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सुभाष चंद्र बोस की 23 वी जयंती आज


सुभाष चन्द्र बोस का जन्म 23 जनवरी 1897 को ओड़िशा के कटक शहर में हिन्दू कायस्थ परिवार में हुआ था l उनके पिता का नाम जानकीनाथ बोस और माँ का नाम प्रभावती था। इनके पिता कटक शहर के मशहूर वकील थे।

दूसरे विश्व युद्ध की शुरुआत में सुभाष चंद्र बोस ने सोवियत संघ, नाजी जर्मनी और इंपीरियल जापान सहित कई देशों की यात्रा की थी. कहा जाता है कि सुभाष चंद्र बोस के इन यात्राओं का मकसद बाकी देशों के साथ आपसी गठबंधन को मजबूत करके भारत में ब्रिटिश सरकार के राज पर हमला करना था जिससे देश को आज़ादी मिल सके

कहा जाता है कि 1921-1941 की अवधि में पूर्ण स्वतंत्रता के लिए अपने रुख के कारण नेताजी सुभाष चंद्र बोस को विभिन्न जेलों में 11 बार जेल की सजा हुई. उन्हें सबसे पहले 16 जुलाई 1921 को 6 महीने के कारावास की सजा दी गई l द्वितीय विश्व युद्ध के दौरान वर्ष 1942 में भारत को अंग्रेजों के कब्जे से स्वतंत्र कराने के लिये आजाद हिन्द फौज या इंडियन नेशनल आर्मी (INA) नामक सशस्त्र सेना का संगठन किया गया l बताया जाता है कि आजाद हिंद फौज के बनने में जापान ने बहुत सहयोग किया था l

आजाद हिंद फौज में करीब 85000 सैनिक शामिल थे l हमेशा से देश हित की बात को सर्वोपरि रखने बाले सुभाष चंद्र बोस भारत की लोगो के मन में आज़ादी की मशाल की तरह जलने लगे. उनकी लोकप्रियता इतनी बढ़ गयी कि एक समय गाँधी जी के नेतृत्व में अहिंसा से देश आज़ाद होने का सपना देखने बाला भारत का आम जनमानस सुभाष चंद्र बोस की आज़ाद हिन्द फ़ौज में शामिल होकर युद्ध के जरिये देश को आज़ाद करने बात करने लगा और अहिंसा के माध्यम से आज़ादी मिलने की बात करने बाले युवा क्रांतिकारी रास्ते पर चलने लगे.

शायद अपनी इसी क्रांतिकारी धारणा के कारण ही उनके उस समय के राजनेताओ के कारण मतभेद बने रहे बो हमेशा से कहते थे कि जब देश का यवा अपना खून मातृभूमि के लिए देगा तभी देश आज़ाद हो पाएगा और हम अपनी शर्तो पर आज़ादी पाएंगे पर उनके ये विचार उनके प्रतिद्वंदियों को पसंद नहीं आये जिसका परिणाम ये हुआ कि 18 अगस्त 1945 के दिन नेताजी कहाँ लापता हो गये और उनका आगे क्या हुआ यह भारतीय इतिहास का सबसे बड़ा रहस्य बन गया हैं। आज उनकी जयंती पर हम सब उस महानं देश भक्त को याद करते हुए ये प्रण लेते है कि राष्ट्रहित की जो भावना उनके मन मे थी बो अपने मन में जलायेगे शायद यह उन महान देशभक्त सच्चा नमन होगा