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AMERICA और IRAN की लड़ाई में कैसे फंस रहा BHARAT

अक्सर दो देशों में अन-बन और लड़ाई होने का सीधा असर तीसरे देश पर पड़ता है जैसे इस वक्त अमेरिका और इरान में जुबानी जंग से लेकर धमकियाँ तक जारी हैं वैसे तो इन दोनों ही देशों में अक्सर ताना तानी रहती है मगर अमेरिकी सेना द्वारा ईरान के बाहुबली जनरल कासिम सुलेमानी को मार दिए जाने के बाद ईरान और अमेरिका के बीच तनाव काफी बढ़ गया है,ऐसे में इसका असर विश्व के बाकी देशों पर भी दिखाई दे रहा है ..भारत उनमें से एक है ..अमेरिका और इरान के बीच अगर तनाव बढ़ता है तो भारत पर इसका असर कैसे सबसे ज्यादा पड़ेगा देखिये इस रिपोर्ट में —-

1-सरकारी आंकड़ों के मुताबिक भारत ने पिछले वित्त वर्ष में अपनी जरूरत के लिए 84 प्रतिशत कच्चा तेल ईरान से आयत किया था ठीक इसी तरह कुल आने वाले तेल के हर तीन में से दो बैरल तेल ईरान से आयात होते हैं वही अगर अमेरिका और ईरान के बीच तनाव इसी तरह बरकरार रहा तो इसका सीधा असर तेल के दामों पर पड़ेगा

2-अगर ईरान और अमेरिका के बीच युद्ध छिड़ता है तो ऐसी स्थिति में भारत को खाड़ी इलाके से अपने नागरिकों को निकालने में ओमान और यूएई की मदद लेनी पड़ सकती है क्यूंकि इन दोनों ही देशों में लाखों भारतीय रहते हैं इससे पहले भी इन इलाकों में युद्ध की स्थिति में भारत को अपने नागरिकों को सुरक्षित बाहर निकालना पड़ा था. साथ ही ये दोनों देश भारत के प्रमुख तेल आपूर्तिकर्ता भी हैं.

3-आंकड़ों के मुताबिक पश्चिम एशियाई देशों में करीब 80 लाख भारतीय रहते हैं इसमें से ज्यादातर लोग फारस की खाड़ी के तटीय इलाकों में रहते हैं वही विदेश मंत्रालय के मुताबिक अकेले ईरान में 4000 भारतीय रहते हैं.

4-भारत और ईरान अफगानिस्तान को लेकर एक समान भारत और ईरान अफगानिस्तान को लेकर एक समान सोच रखते हैं वही अफगानिस्तान में भी भारत के हितों को नुकसान हो सकता है यही वजह है कि भारतीय विदेश मंत्री एस जयशंकर ने ईरान से संपर्क साधा है भारत को इन दोनों देशों के तनाव से कम से कम 10 मोर्चे पर झटके लगने वाले हैं

5- भारत अपनी जरूरत का 83 फीसदी तेल आयात करता है जंग की स्थिति में फॉरेन एक्सचेंज पर भी असर पड़ेगा अगर फॉरेन एक्सचेंज बढ़ता है तो मंदी और गहरा जाएगी. खाने-पीने की चीजें, ट्रांसपोर्ट, रेलवे, प्राइवेट ट्रांसपोर्ट पर भी बुरा असर होगा साथ ही बेरोजगारी और बढ़ जाएगी.

6- दोनों देशों के बीच अगर युद्ध हुआ तो भारत को कच्चा तेल आयात करने में काफी दिक्कतों का सामना करना पड़ेगा हालांकि बीते दो सालों में ईरान और अमेरिका के बीच जारी तनाव से भारत ने ईरानी तेल आयात को बहुत कम कर दिया है. लेकिन अब भी देश में तेल बड़ी तादाद में ईराक, सऊदी अरब से आते हैं

7- कच्चे तेल के दाम बढ़ने से पेट्रोल और डीजल की कीमतों में इजाफा होगा जिससे तेल के दाम बढ़ने से महंगाई बढ़ेगी और इसका सीधा असर लोगों की जेब पर पड़ेगा वैसे भी सरकार लगातार महंगाई दर पर काबू पाने की कोशिश कर रही है लेकिन अमेरिका-ईरान के बीच युद्ध की स्थिति में महंगाई दर के मोर्चे पर सरकार को तगड़ा झटका लग सकता है

8- मोदी सरकार हर हाल से इकोनॉमी को रफ्तार देने के लिए वित्तीय घाटे को कम करने में जुटी है वही 30 नवंबर तक देश का वित्तीय घाटा 8.07 लाख करोड़ रुपये है वित्तीय घाटा पर जब लगाम लगेगा तभी आर्थिक ग्रोथ संभव है लेकिन ईरान और अमेरिका में तनाव से सरकार की आमदनी घट जाएगी और खर्चा बढ़ जाएगा.

9- पिछले वित्त वर्ष भारत ने 32,800 करोड़ रुपये के बासमती चावल का निर्यात किया था जिसमें से करीब 10,800 करोड़ रुपये का बासमती चावल केवल ईरान को निर्यात किया गया था इस बार भी बड़े पैमाने से चावल निर्यात को लेकर ईरान से समझौता हुआ है लेकिन युद्ध की स्थिति में निर्यात पर असर पड़ना लाजिमी है

10-सबसे ज़रूरी है मोदी सरकार ने 2024 तक भारत को 5 ट्रिलियन डॉलर की अर्थव्यवस्था वाला देश बनाने का लक्ष्य रखा है इस लक्ष्य तक पहुंचने के लिए भारत को अमेरिका और ईरान दोनों की अप्रत्यक्ष रूप से जरूरत होगी बड़े पैमाने पर भारत इन दोनों देशों से निवेश की उम्मीद कर रहा है लेकिन इरान और अमेरिका के बीच बढ़ते तनाव भारत के लिए खासा नुक्सान साबित हो सकते हैं

 

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