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Cricketer Yashasvi Jaiswal का गोलगप्पे से शतक का सफर

यशस्वी को वर्ल्ड कप में शतक लगाने का अपना सपना पूरा करने के लिए कई संघर्षो का सामना करना पड़ा था महज 11 साल की उम्र में वह उत्तर प्रदेश के छोटे से जिले भदोही से मुंबई आ गए। वह पहले अपने चाचा के पास गए लेकिन वहां रहने की जगह बहुत कम थी। इसलिए वह वहां से निकलकर रहने का कोई दूसरा ठिकाना तलाशने लगे। उनके पास रहने के लिए कोई जगह नहीं थी। उन्हें एक टेंट में भी रहना पड़ा था जहा पर बिजली और बाथरूम जैसी मूल सुविधाएं भी नहीं थी पर क्रिकेटर बनने के सपने ने उन्हें हर मुश्किल से लड़ने की ताकत दी और उन्होंने अपना रास्ता खुद बनाया…… मुश्किल वक्त पर अपना खर्च चलाने के लिए यशस्वी को मुंबई के आजाद मैदान पर पानी-पूरी बेचनी पड़ती थी। यह करते हुए उन्हें बुरा तो बहुत लगता था लेकिन उन्हें यह करना पड़ा क्योंकि उन्हें जरूरत थी। वे जिन खिलाड़ियों के साथ खेलते थे शाम को उन्हीं को गोलगप्पे बेचा करते थे।

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