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यूपी का अपराध मुक्त एक दिन… पुलिस की शाबाशी!


शैलेंद्र सिंह 

 

साल 2019 में 9 नवंबर का दिन इतिहास के पन्‍नों में दर्ज हो गया क्‍योंकि इस दिन देश की सर्वोच्‍च न्‍यायालय ने अयोध्‍या के राम जन्‍म‍भूमि और बाबरी मस्जिद भूमि विवाद पर ऐतिहासिक फैसला सुनाया। अयोध्‍या में राम मंदिर निर्माण का फैसला जहां राम भक्‍तों के लिए उनके रामलला की जीत के रूप में आया वहीं मस्जिद के लिए पांच एकड़ जमीन देना सांप्रदायिक सौहार्द के रूप में देखा जा रहा है। हालांकि, इस फैसले पर विशेष समुदाय के कुछ लोग अभी भी असंतुष्‍ट हैं। 9 नवंबर का दिन अयोध्‍या पर ऐतिहासिक फैसले के साथ ही उत्‍तर प्रदेश के लिए भी बड़ा ही महत्‍वपूर्ण रहा। ऐसा इसलिए क्‍योंकि इस दिन पूरे प्रदेश में रामराज्य जैसा नजारा देखने को मिला। बीते ढाई साल में शनिवार (9 नवंबर) को सूबे में पहला मौका था, जब यहां एक भी हत्या, लूट, अपहरण, बलात्कार और डकैती जैसी कोई वारदात नहीं हुई। इस तरह, फैसले के दिन उत्‍तर प्रदेश पूरी तरह से अपराधमुक्त रहा।

अयोध्‍या पर फैसले का बेसब्री से इंतजार सिर्फ उत्‍तर प्रदेश को नहीं बल्कि पूरे देश समेत विश्‍व को भी था। उच्‍चतम न्‍यायालय के न्‍यायाधीशों द्वारा मामले पर फैसला सुनाने से पहले और बाद में जो बड़ी जिम्‍मेदारी थी… वो थी उत्‍तर प्रदेश सरकार और पुलिस प्रशासन की। मामले पर सुप्रीम कोर्ट का फैसला आने से पहले प्रदेश में शांति व्‍यवस्‍था कायम रखना और फैसला आने के बाद में इसका उचित प्रकार से निर्वहन करते हुए उचित व्‍यवस्‍था बनाए रखना और कोई उन्‍माद न होने देना उत्‍तर प्रदेश और पुलिस प्रशासन की बड़ी जीत को दर्शाता है, जो काबिले तारीफ है। अयोध्या भूमि विवाद पर शीर्ष अदालत के फैसले के दिन उत्तर प्रदेश में कानून व्यवस्था को बनाए रखने के लिए प्रशासन सतर्क था। सूबे के मुखिया योगी आदित्यनाथ खुद लगातार सक्रिय थे और पल-पल की अपडेट ले रहे थे। इतना ही नहीं फैसले के दिन मुख्‍यमंत्री यूपी 112 के कंट्रोल रूम में पहुंच गए। कंट्रोल रूम में पहुंचकर खुद ही प्रदेश के हर जिले के जिलाधिकारी, एसएसपी और एसपी को कानून-व्यवस्था बनाए रखने की हिदायत दी। इसका नतीजा यह हुआ कि जिस दिन फैसला आया, उस दिन प्रदेश में एक भी घटना नहीं हुई।

अपराध पर नज़र और नियंत्रण रखने के लिए डीजीपी मुख्यालय में कंट्रोल रूम है। यहां हर दिन अपराध की स्थिति, घटनाओं में क्या कार्रवाई हुई और बीते 24 घंटे में कौन-कौन सी वारदात हुई, इसपर नजर रखी जाती है और जब फैसले के दिन की घटनाओं के लिए जोन स्तर से डीजीपी मुख्यालय ने आंकड़े जुटाने शुरू किए तो हर जोन से गंभीर अपराध के सभी मामले शून्य-शून्य आने लगे। डीजीपी मुख्यालय को एक बार तो इन आंकड़ों पर विश्वास नहीं हुआ और फिर जिलों से चेक कराने के बाद दोबारा आंकड़े मांगे गए तो भी यही आंकड़ा आया, जिसे देख सभी हैरान थे। यूपी का जो एक दिन अपराधमुक्‍त रहा, वो पूरी तरह से प्रदेश सरकार और पुलिस की सजगता का प्रमाण देता है, जो सराहनीय है।

दूसरी तरफ, दुबई सरकार और दुबई पुलिस द्वारा पहली बार आयोजित ‘इंटरनेशनल कॉल सेंटर अवार्ड’ समारोह में यूपी 112 को आपात सेवा की पुलिस श्रेणी में तीसरा स्थान प्राप्त हुआ, जो अपने कुछ दिनों के कार्यकाल में ही विश्व स्तर पर अपनी पहचान बनाने में कामयाब रहा। एडीजी यूपी 112 मुख्यालय असीम अरुण ने बताया कि पुलिस श्रेणी में विश्व भर से 500 से अधिक पुलिस संस्थाओं ने भागीदारी की, जिसमें यूपी 112 को तीसरा स्थान हासिल हुआ। उत्तर प्रदेश में यूपी 112 की प्रकिया शुरू करने के बाद वैज्ञानिक आधार पर गश्त, हर कॉल पर पूरी कानूनी कार्रवाई व नागरिकों के पंजीकरण जैसी सेवाओं का पुरस्कार हासिल करने में अहम योगदान रहा।

उत्‍तर प्रदेश पुलिस प्रशासन की लगातार ये दो उपलब्धियां हासिल करना उसकी सजगता को दर्शाता है लेकिन क्‍या यही पर्याप्‍त है? जिस तरह से यूपी पुलिस ने अयोध्‍या मामले पर फैसले के दिन अपराधों पर नियंत्रण करने में सफलता हासिल की थी, क्‍या उसी तरह से हर दिन अपराधों पर अंकुश लगाने के लिए प्रयास नहीं किया जा सकता! यूपी 112 ने अपनी कार्यप्रणाली के लिए विश्‍व में तीसरा स्‍थान हासिल किया है तो इससे उसकी जिम्‍मेदारी और ज्‍यादा बढ़ गई है कि वो अपराधों पर अंकुश लगाते हुए शिकायतकर्ताओं को उचित न्‍याय दिला सके। अगर हम एनसीआरबी और इंडिया जस्टिस रिपोर्ट 2019 के आंकड़ों की बात करें तो उत्‍तर प्रदेश अपराध में नंबर वन और इंसाफ दिलाने में सबसे निचले स्‍तर पर आता है। ऐसे में राज्‍य सरकार के साथ ही यूपी पुलिस की सबसे अहम जिम्‍मेदारी बनती है कि वो अपराध के इन आंकड़ों को ज्‍यादा से ज्‍यादा कम करे और जनता को इंसाफ दिलाने में भी अहम भूमिका निभाए।

कुछ भ्रष्‍ट, लापरवाह, असंवेदनशील और कार्यों में शिथिल अफसरों ने यूपी पुलिस की छवि को दागदार कर रखा है, जिसे मिटाकर इसको नंबर एक बनाने की जिम्‍मेदारी भी सरकार और पुलिस प्रशासन की ही है। उत्‍तर प्रदेश पुलिस प्रशासन को लगातार मिली उपलब्धियां दर्शाती हैं कि वह सिर्फ एक दिन ही नहीं बल्कि प्रदेश को हमेशा के लिए अपराधमुक्‍त करने की क्षमता रखती है बस जरूरत है तो सभी द्वारा उचित कार्रवाई किए जाने की। इसके लिए पूरे प्रशासन को जागृत होने की जरूरत है, जिससे उत्‍तर प्रदेश को अपराधमुक्‍त बनाया जा सके।