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नई गाइडलाइंस : होम आइसोलेशन में किसे और कितने दिन रहना होगा ?


 

भारत सरकार ने कोरोना वायरस संक्रमण केप्री-सिम्प्टोमैटिक मरीजों के लिए होम आइसोलेशन की गाइडलाइन में कुछ तब्दीली की है। अब होम आइसोलेशन वाले मरीज शुरुआती लक्षण दिखने के 17 दिन बाद आइसोलेशन खत्म कर सकेंगे। प्री-सिम्पटोमैटिक मामलों में सैंपलिंग के दिन से 17 दिन गिने जाएंगे। दोनों मामलों में यह शर्त होगी कि 10 दिन से बुखार नहीं आया हो। आइसोलेशन खत्म होने के बाद कोरोना टेस्ट करवाना जरूरी नहीं होगा।

बता दें कि इससे पहले स्वास्थ्य मंत्रालय ने 27 अप्रैल को गाइडलाइन जारी कर प्री-सिम्प्टोमैटिक मरीजों को होम आइसोलेशन की इजाजत दी थी। अब होम आइसोलेशन वाले मरीजों और उनकी देखभाल करने वालों के लिए नए निर्देश जारी किए हैं। दोनों को ट्रिपल लेयर मास्क पहनना जरूरी होगा।

आइये जानते हैं नई गाइडलाइन के मुताबिक़ कौन होम आइसोलेशन में रह सकता है?

जिसमें कोरोना के बेहद कम या बिल्कुल भी लक्षण न दिख रहे हों।
इस स्थिति में शख्स घर में अलग रह सकता है। परिवार के लोगों को अलग रहना होगा।
शख्स की देखभाल के लिए एक व्यक्ति 24 घंटे मौजूद होना चाहिए जो हॉस्पिटल के भी टच में रहे।
फोन में आरोग्य सेतु ऐप होना चाहिए जो हमेशा एक्टिव रहे।

कब खत्म होगा होम आइसोलेशन
कोरोना के लक्षण दिखने के 17 दिनों बाद तक होम आइसोलेशन में रहना होगा। फिर 10 दिन तक उसे बुखार न आने पर होम आइसोलेशन खत्म किया जा सकता है। अंत में दोबारा टेस्टिंग की जरूरत नहीं है। जो लोग मरीज की देख-रेख करेंगे उनके लिए भी गाइडलाइंस हैं। जैसे उन्हें मास्क लगाकर ही मरीज के पास जाना है और हाथ लगातार साफ करने हैं।

वहीँ मरीजों के लिए गाइडलाइंस में बताया गया है कि मरीज को हमेशा ट्रिपल लेयर मास्क पहनना है। हर 8 घंटे में मास्क बदलना होगा।
मास्क को 1% सोडियम हाइपो-क्लोराइट से डिस्कार्ड करना होगा।
घर में कोरोना मरीज का कमरा बिल्कुल अलग होना चाहिए। सबको पता होना चाहिए कि उस कमरे में नहीं जाना है।
हाथ को कम से कम 40 सेकंड तक धोना है। सैनिटाइजर भी इस्तेमाल कर सकते हैं।
अपना कोई पर्सनल आइटम किसी से शेयर न करें। टेबल, गेट के हैंडल आदि को लगातार साफ करवाना है।
मरीज को डॉक्टर के निर्देश और दवाओं से जुड़ी सलाह माननी पड़ेगी।
मरीज को पर्याप्त आराम करना चाहिए और ज्यादा से ज्यादा पानी या तरल (फ्लुइड) पदार्थ खाने-पीने में लेना चाहिए।
मरीज अपनी हालत को खुद मॉनिटर करेगा। हर दिन शरीर के तापमान की जांच करेगा। अगर स्थिति बिगड़ने के लक्षण दिखें तो तुरंत बताना होगा।