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कहीं सोने की प्रतिमा… तो कहीं माटी की मां


शैलेंद्र सिंह

इस समय नवरात्र का पावन पर्व चल रहा है। श्रद्धा और आस्था के बीच मां दुर्गा की पूजा शुरू हो गई है। इस अवसर पर श्रद्धालु व्रत रख‍कर और माता की पूजा-अर्चना करके मनवांछित फल पाने की कामना करते हैं। षष्ठी के दिन मां पंडाल में विराजमान हो जाएंगी। जहां एक तरफ पंडाल सजाने का काम करीब-करीब पूरा हो गया है, वहीं मूर्तिकार भी मां की प्रतिमाओं में जान डालने में जुटे हैं। वह काबिलियत की कूचियों से ऐसे रंग भरे जा रहे हैं कि मानों प्रतिमाएं अभी बोल पड़ेंगी।

20 करोड़ रुपए की कीमत से सजा पंडाल और मां की प्रतिमा

यूं तो दुर्गा पूजा के अवसर पर मां की एक से बढ़कर एक प्रतिमाएं देशभर में बनती हैं, लेकिन कई स्‍थानों पर ऐसे पंडाल और प्रतिमाएं भी बनती हैं जो पूरे देश का ध्यान अपनी ओर खींचती हैं। पश्च‍िम बंगाल में भी दुर्गा पूजा के भक्तिमय माहौल के बीच कोलकाता की एक दुर्गा उत्सव समिति ने मां दुर्गा की प्रतिमा पर 50 किलो सोना लगाया है। दुर्गा माता की प्रतिमा और पंडाल में जितना सोना लगा है, उसकी कीमत करीब 20 करोड़ रुपये बताई जा रही है। समिति के सचिव सजल घोष ने एक एजेंसी को बताया कि माता को सिर से पैर तक सोने की परतों से मढ़ा गया है। उन्होंने दावा किया कि संभवत: इस नवरात्र में यह देश में सबसे महंगी प्रतिमा है।

मिट्टी से बनी प्रतिमाओं की जीवंत स्‍वरूप

एक तरफ जहां कोलकाता में मां दुर्गा की प्रतिमा में सोना और पंडाल की सजावट में भी सोना लगा है वहीं, उत्‍तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ में मूर्तिकारों-कलाकारों ने मिट्टी से मां की प्रतिमाओं का ऐसा रूप साकार किया है जैसे वह अभी जीवंत हो उठेंगी। मूर्तिकार 6 महीने पहले से ही मां की प्रतिमा बनाने की तै‍यारियों में जुटे हुए हैं और अब करीब-करीब सभी प्रतिमाएं तैयार हो चुकी हैं। मूर्तिकारों का कहना है कि यहां से भी मां की प्रतिमाएं कई जगहों पर पूजा के लिए ले जाई जाती हैं। यहां मूर्तिकारों द्वारा मिट्टी से सजाई-संवारी गई मां की इन प्रतिमाओं की कीमत करीब 18 हजार रुपए से शुरू होकर 1 लाख तक की है।

 

 

सबसे ज्‍यादा मां की आंखों पर ध्‍यान देते हैं मूर्तिकार

मूर्तिकार-कलाकार द्वारा बनाई गई देवी मां की ऐसी कोई प्रतिमा नहीं है, जिसकी आंखों में तेज न दिखाई देता हो। माटी की इस प्रतिमा में ऐसी जादूगरी की जाती है कि वह जीवंत दिखाई देती हैं। खासतौर पर देवी मां की आंखें…। मूर्तिकार बताते हैं कि देवी प्रतिमा बनाते समय सबसे ज्यादा ध्यान मां की आंखें बनाने में रखना होता है। प्रतिमा के भावों के हिसाब से आंखों को डिजाइन किया जाता है। कहते हैं जो भाव मां के चेहरे पर दिखाना है वही भाव मूर्तिकार को अपने मन में साधना होता है।