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जब सैयां भये हिन्दू हृदय सम्राट तब राम मंदिर के लिए जन आन्दोलन काहे को भैयाजी..?


राम जन्भूमि अयोध्या में भगवान् श्री राम का भव्य मंदिर कब बनेगा इसका फैंसला जब कानून के तहत अदालत को सौंपा हो तब उसमे जल्दबाजी नहीं हो सकती। अयोध्या में विवादी भूमि किसकी उसका केस चल रहा है। हाल ही में उसकी सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने जल्द केस चलाने की मांग को डर किनारे कर जनवरी २०१९ में सुनवाई तय की तो आरएसएस खफा गई।

संघ के महासचिव सुरेश भैयाजी जोशी ने अदालत के निर्णय से नाराज होकर कह दिया की समाज हमेंशान्यायालय से नहीं चलता। कोर्ट की टिपण्णी से हिन्दुओं का अपमान हुवा यह भी कहा उन्होंने और घोषित कर दिया की अब बहुत लम्बा इन्तजार हो गया अब तो १९९२ जैसा जन आन्दोलन फिर एक बार राम मंदिर के लिए करना होंगा। भारत लोकतांत्रिक देश है। जन आन्दोलन हर नागरिक का अधिकार है। लेकिन राम मंदिर के लिए बार बार जन आन्दोलन की क्या जरुरत है ? कारण साफ़ है। संघ को भी पता है। फिर जन आन्दोलन कर महंगाई की मार झेल रहे लोगो को काहे परेशान करना?

२०१४ के चुनाव में भाजपा और हिन्दू हृदय सम्राट नरेन्द्र मोदीजी ने पूर्ण बहुमत मिला तो राम मंदिर निर्माण कार्य शुरू करने का वचन दिया था। अब ये बात ओर है की भगवान् राम ने वचन निभाते वनवास गये लेकिन पूर्ण बहुमत के बाद भी हिन्दू हृदय सम्राट ने वचन नहीं निभाया तो उसमे कोर्ट क्या करे। कोर्ट की अपनी निश्चित प्रक्रिया है। कोर्ट किसी समूह की आश्था और समाज की भावनाओं से नहीं चलती ये संघ का हर एक बच्चा बच्चा जानता है। लेकिन फिर भी अदालत मानो उनकी जेब में हो इस तरह के ब्यान दिए जाते है संघ के नेतागण की ओर से। नेताओं के ऐसे ब्यान को कौन रोकेंगा भला?

ठीक है संघ अपनी बात रखे लोकतंत्र में। उन्हें भी अधिकार है। मगर जहा तक राम मंदिर के लिए फिर से जन आन्दोलन शुरू करने की बात है तो वह चुनावी स्टंट के अलावा ओर कुछ नहीं। पांच राज्यों में चुनाव चल रहे है। हो सकता है की मतदाता को प्रभावी करने के लिए जन आन्दोलन की बात कही गई हो।

आखिर संघ को जन आन्दोलन करने की क्या जरुरत है? केंद्र में उनकी पूर्ण बहुमत से भी ज्यादा सीटो वाली सरकार है। राम मंदिर का वचन भी दिया था। भाजपा की सहयोगी पार्टी शिवसेना ने तो यहाँ तक कहा की राम मंदिर का कानून बनाने में प्रधानमंत्री जी को 10 मिनिट लगेंगे। संघ को आन्दोलन करने की बजाय राम मंदिर नहीं बनानेवाली सरकार को बर्खास्त करे। देश के प्रधानमंत्री खुद परम राम भक्त है।

उन्होंने राम रथ यात्रा की अगुवाई की थी जन उनके गुरु आडवाणी जी ने सोमनाथ से अयोध्या की और प्रस्थान किया था। खुद प्रधानमंत्री हिन्दू हृदय सम्राट है तब जन आन्दोलन न करते हुए अपनी ही पूर्ण बहुमतवाली सरकार से कहे की तीन तलाक की तरह राम मंदिर के लिए भी कानून बनाए। एक शुरुआत तो करे। एक कदम तो आगे बढे कानून बनाने की ओर। क्योंकि एक कदम आगे बढ़ेंगे तो दूसरा कदम अपने आप आगे बढेंगा। महंगाई की मार झेल रहे लोगो को परेशान करने की बजाय उन्हें दो वक्त की रोटी का इंतजाम करने दे। मंदिर आप बनावो लोग दर्शन के लिए तैयार है।