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मोदी सरकार को निशाना बनाकर, कांग्रेस प्रवासी मजदूरें के लिए आई आगे


नई दिल्ली। कोरोना वायरस के संक्रमण के कारण देश लॉकडाउन की मार झेल रहा है। इस लॉकडाउन के चलते लाखों प्रवासी मजदूर अलग-अलग राज्यों में फंसे हैं। जिनकी घर वापसी का कार्य शुरू हो गया है। लाखों प्रवासी मजदूर को उनके घर तक पहुंचाने के लिए केंद्र और राज्य सरकारें एक साथ मिलकर काम कर रही हैं। इन सभी के लिए स्पेशल ट्रेन चलाई जा रही है। लेकिन इसके लिए उन्हें किराया चुकाना पड़ रहा है। जिससे विपक्ष मोदी सरकार पर लगातार हमला बोल रहा है।

सोमवार को कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी ने भी मोदी सरकार पर निशाना साधा है। उन्होंने एक बयान जारी कर कहा है कि विदेश में फंसे भारतीयों को मुफ्त में वापस लाया गया जबकि कामगारों से किराया वसूला जा रहा है। ऐसे में उन्होंने फैसला लिया है कि प्रदेश कांग्रेस कमेटी की हर इकाई हर जरूरतमंद श्रमिक और कामगार के घर लौटने की रेल यात्रा का टिकट खर्च वहन करेगी और जरूरी कदम उठाएगी।

सरकार पर निशाना साधते हुए सोनिया गांधी ने कहा है किृ ‘दुख की बात यह है कि भारत सरकार व रेल मंत्रालय इन मेहनतकशों से मुश्किल की इस घड़ी में रेल यात्रा का किराया वसूल रहे हैं। श्रमिक व कामगार राष्ट्रनिर्माण के दूत हैं। जब हम विदेशों में फंसे भारतीयों को अपना कर्तव्य समझकर हवाई जहाजों से निशुल्क वापस लेकर आ सकते हैं, जब हम गुजरात के केवल एक कार्यक्रम में सरकारी खजाने से 100 करोड़ रुपये ट्रांसपोर्ट व भोजन इत्यादि पर खर्च कर सकते हैं, जब रेल मंत्रालय प्रधानमंत्री के कोरोना फंड में 151 करोड़ रु. दे सकता है, तो फिर तरक्की के इन ध्वजवाहकों को आपदा की इस घड़ी में निशुल्क रेल यात्रा की सुविधा क्यों नहीं दे सकते?’

कांग्रेस अध्यक्षा ने अपने बयान में कहा है, श्रमिक व कामगार देश की रीढ़ की हड्डी हैं। उनकी मेहनत और कुर्बानी राष्ट्र निर्माण की नींव है। सिर्फ चार घंटे के नोटिस पर लॉकडाऊन करने के कारण लाखों श्रमिक व कामगार घर वापस लौटने से वंचित हो गए। 1947 के बंटवारे के बाद देश ने पहली बार यह दिल दहलाने वाला मंजर देखा कि हजारों श्रमिक व कामगार सैकड़ों किलोमीटर पैदल चल घर वापसी के लिए मजबूर हो गए।

सोनिया गांधी ने कहा, ‘न राशन, न पैसा, न दवाई, न साधन, पर केवल अपने परिवार के पास वापस गांव पहुंचने की लगन। उनकी व्यथा सोचकर ही हर मन कांपा और फिर उनके दृढ़ निश्चय और संकल्प को हर भारतीय ने सराहा भी। पर देश और सरकार का कर्तव्य क्या है? आज भी लाखों श्रमिक व कामगार पूरे देश के अलग अलग कोनों से घर वापस जाना चाहते हैं, पर न साधन है, और न पैसा।’