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पूर्व कांग्रेसी नेता का हुआ निधन, राजभवन में छाया सन्नाटा

कांग्रेस की वयोवृद्ध नेता स्वरूप कुमारी बख्शी का शनिवार देर रात निधन हो गया. 22 जून 2019 को वह अपने जीवन के 100 साल पूरे करने वाली थीं पर इससे पहले ही उन्होंने सबको अलविदा कह दिया

कांग्रेस की वयोवृद्ध नेता स्वरूप कुमारी बख्शी का शनिवार देर रात निधन हो गया. 22 जून 2019 को वह अपने जीवन के 100 साल पूरे करने वाली थीं पर इससे पहले ही उन्होंने सबको अलविदा कह दिया।

10 अप्रैल को कमजोरी के चलते उनकी तबियत ख़राब हो गई थी और उन्हें डॉ. राम मनोहर लोहिया इंस्टीट्यूट में भर्ती कराया गया था। जहां शनिवार रात 9.02 मिनट पर उन्होंने अपनी अंतिम सांस ली। आज रविवार सुबह 10.45 बजे उनकी अंतिम यात्रा भैंसाकुंड के लिए रवाना होगी जहाँ पर उनका अंतिम संस्कार किया जाएगा।

बख्शी दीदी की इकलौती बेटी ऊषा मालवीय ने बताया कि 22 जून 1919 को स्वरूप कुमारी बख्शी का जन्म हुआ था। वह 99 साल नौ माह और लगभग 22 दिन की थी। उन्हें शारीरिक कमजोरी की शिकायत के बाद 10 अप्रैल को लोहिया इंस्टीट्यूट में भर्ती कराया गया था.

वहां पर जाँच में उनका हीमोग्लोबिन कम पाया गया. जिसके चलते उनके शरीर में खून की कमी थी. और उनको फेफड़ों में संक्रमण के चलते उन्हें सांस लेने में भी दिक्कत का सामना करना पड़ रहा था. चार दिनों तक उनका उपचार हुआ और फिर उनकी मृत्यु हो गई.  कांग्रेस के पदाधिकारियों को बख्शी दीदी के निधन की सूचना दे दी गई है.

बख्शी दीदी के निधन के बाद रविवार रात को ‘राजभवन’ में अजीब सा सन्नाटा पसर गया। उत्तर प्रदेश में कई बार मंत्री रहने के बावजूद वो हमेशा राजभवन में ही रहीं, उन्होंने कभी सरकारी आवास नहीं लिया। बख्शी दीदी के निजी सचिव विजय सक्सेना ने बताया कि उन्हें राजभवन से बहुत लगाव था। इसलिए वह मंत्री रहने के बावजूद कभी भी सरकारी आवास में नहीं रही. उन्होंने बताया कि सर्दियों में भी सुबह 7.30 से 11 बजे तक वह राजभवन के अपने ऑफिस में बैठती थीं। इसके बाद विधान भवन के लिए निकलती थीं.

बख्शी दीदी परिवार में इकलौती थी। उनका कोई भाई-बहन नहीं था। उनके पिता भी अपने परिवार में इकलौते थे। इसी तरह बख्शी दीदी के भी सिर्फ एक बेटी ऊषा मालवीय हैं.

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