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संकट में सरकार, अब वर्ल्ड बैंक ने भारत को दिया झटका

आर्थिक मंदी के बीच अब वर्ल्‍ड बैंक से भारत को एक और झटका मिला है। रविवार को विश्व बैंक ने मौजूदा वित्त वर्ष में भारत के विकास दर का अनुमान कम कर दिया है। इससे केंद्र की नरेंद्र मोदी सरकार को झटका लग सकता है। विश्व बैंक ने भारत की ग्रोथ रेट घटाकर 6 फीसदी कर दी है।

दरअसल, साल 2018-19 में भारत की ग्रोथ रेट 6.9 फीसदी रही थी। हालांकि, साउथ एशिया इकोनॉमिक फोकस के लेटेस्ट एडिशन में विश्व बैंक ने ये भी कहा कि साल 2021 में भारत ग्रोथ रेट को 6.9 फीसदी फिर से रिकवर कर सकता है। विश्व बैंक ने कहा है कि लगातार दूसरे साल भारत की आर्थिक विकास दर की रफ्तार गिरी है। 2017-18 में यह 7.2 फीसदी थी, जो 2018-19 में घटकर 6.8 फीसदी हो गई। हालांकि, मैन्युफैक्चरिंग और कंस्ट्रक्शन एक्टिविटीज बढ़ने से इंडस्ट्रियल आउटपुट ग्रोथ बढ़कर 6.9 फीसदी हो गई, जबकि एग्रीकल्चर और सर्विस सेक्टर में ग्रोथ 2.9 फीसदी और 7.5 फीसदी तक रही।

मूडीज ने घटाया जीडीपी का अनुमान

इससे पहले क्रेडिट रेटिंग एजेंसी मूडीज ने भारत के जीडीपी ग्रोथ अनुमान को घटा दिया। मूडीज का अनुमान है कि वित्त वर्ष 2019-20 के लिए भारत की जीडीपी ग्रोथ 5.8 फीसदी रह सकती है। इससे पहले पहले मूडीज का जीडीपी ग्रोथ अनुमान 6.2 फीसदी था। इस लिहाज से मूडीज ने जीडीपी ग्रोथ अनुमान में 0.4 फीसदी की कटौती की है। इसके साथ ही मूडीज ने भारतीय अर्थव्‍यवस्‍था को लेकर गंभीर चेतावनी भी दी। मूडीज ने कहा है कि अगर अर्थव्यवस्था में सुस्ती जारी रहती है तो सरकार की राजकोषीय घाटा कम करने की कोशिश को झटका लगेगा। इसके साथ ही कर्ज का बोझ भी बढ़ता जाएगा।

आरबीआई ने भी दिया झटका

मूडीज की तरह देश के केंद्रीय बैंक आरबीआई ने भी चालू वित्त वर्ष के लिए ग्रोथ रेट का अनुमान घटाया है। आरबीआई के अनुमान के मुताबिक, इस वित्त वर्ष में जीडीपी ग्रोथ 6.1 फीसदी की दर से हो सकता है। इससे पहले आरबीआई ने 6.9 फीसदी की दर से जीडीपी ग्रोथ का अनुमान जताया था। यानी कुछ महीनों में ही आरबीआई ने जीडीपी ग्रोथ के अनुमानित आंकड़े में 0.8 फीसदी की कटौती कर दी है।

भारत को वैश्विक अर्थव्यवस्था में आर्थिक सुस्ती से भी नुकसान

वहीं, अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष (आईएमएफ) के चीफ क्रिस्टालिना जॉर्जिएवा ने आर्थिक सुस्ती को लेकर चेतावनी जा रही है। उन्होंने कहा कि वैश्विक अर्थव्यवस्था में आर्थिक सुस्ती देखी जा रही है, जिसके कारण 90 फीसदी देशों की विकास की रफ्तार धीमी रहेगी। तेजी से उभरती अर्थव्यवस्था के कारण भारत में सबसे ज्यादा इसका असर देखा जाएगा।

गौरतलब है कि भारत सरकार के आंकड़ों के हिसाब से जून में खत्म हुई तिमाही में जीडीपी विकास दर 5 फीसदी दर्ज की गई। यह मार्च 2013 के बाद से न्यूनतम है। उस समय जीडीपी वृद्धि दर 4.7 प्रतिशत पर पहुंच गई थी।

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