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सोहराबुद्दीन इनकाउंटर केस में क्यों झाड़ा पल्ला


मुंबई : मंगलवार को सोहराबुद्दीन इनकाउंटर केस में मुंबई सीबीआई स्पेशल कोर्ट में अंतिम बहस जारी रही। राजस्थान टीम के इंस्पेक्टर अब्दुल रहमान, एसआई हिमांशु सिंह और श्याम सिंह के वकीलों ने कोर्ट में दलील देते हुए कहा कि उनके मुवक्किल तत्कालीन एसपी दिनेश एमएन के साथ न तो अहमदाबाद गए थे और न ही एनकाउंटर में शामिल थे। वकीलों ने कहा मेरे मुवक्किल पर लगाए गए आरोप के कोई साक्ष्य या गवाह नहीं हैं।

वकील वहाव खान ने अब्दुल रहमान की ओर से कोर्ट में कहा कि सोहराबुद्दीन केस में दर्ज एफआईआर ही उनकी नहीं है। यह पड़ताल कभी नहीं की गई कि एफआईआर या रिपोर्ट किसने डिक्टेट की थी, किसने लिखी थी, कौन इसे थाने पर लेकर आया था और इस पर किसके हस्ताक्षर हैं।

वहाव खान ने जेलर रामअवतार के कोर्ट में हुए बयानों का हवाला देते हुए कहा कि अभियोजन पक्ष का यह दावा कि मेरे मुवक्किल ने तुलसी के पास एक मोबाइल प्लांट करने का प्रयास किया था और उस मोबाइल का इंटरसेप्शन तत्कालीन सूरजपोल इंस्पेक्टर हिम्मत सिंह को दिया था, यह पूरी तरह झूठा है। क्यों कि जेलर ने खुद यह बयान दिए है कि जेल में इस तरह से मोबाइल प्लांट करना संभव नहीं है। इसके अलावा किसी भी मोबाइल नंबर को इंटरसेप्शन पर लेने की अनुमति आईजी गृह विभाग से प्राप्त करते हैं। ऐसे में मेरे मुवक्किल को सोहराबुद्दीन-तुलसी दोनों ही एनकाउंटर से कोई संबंध नहीं है।