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मालदीव में यामीन की हार से खुला भारत के लिए रणनीतिक रास्ता

नई दिल्ली: मालदीव के राष्ट्रपति चुनाव के नतीजे विश्व के लिए अप्रत्याशित हैं। वैश्विक पर्यवेक्षक भी चुनाव निष्पक्ष नहीं होने की बात कर रहे थे, बावजूद इसके विपक्ष के संयुक्त उम्मीदवार इब्राहिम मोहम्मद सोलिह जीत गए। मालदीव में अब्दुल्ला यामीन की हार चीन के लिए झटका तो भारत के लिए मौका है।

यामीन को चीन का बेहद करीबी माना जाता है और वह पिछले कुछ वक्त से लगातार भारत से दूरी बना रहे थे। मालदीव चुनाव के नतीजों पर सबसे पहले प्रतिक्रिया देनेवाले देश में भारत रहा। इब्राहिम सोलिह की जीत ने एक बार फिर भारत को मालदीव के साथ कूटनीतिक संबंधों की रेस में ला दिया है। पिछले 2 साल से हिंद महासागर के पड़ोसी देश मालदीव के साथ भारत के संबंध उतार-चढ़ाव से भरे रहे हैं।

मालदीव चुनावों के नए नतीजे अब एक बार फिर से दोनों देशों के बीच द्विपक्षीय संबंधों की शुरुआत की दिशा में कड़ी साबित हो सकते हैं। अमेरिका और श्रीलंका के साथ भारत नई सरकार को बधाई देनेवाले देशों में सबसे आगे रहा। भारत की इस पहल के अपने कूटनीतिक संदेश भी हैं। मालदीव की नई सरकार को बधाई देकर भारत ने एक तरह से चीन-परस्त अब्दुल्ला यामीन को यह संदेश दिया कि पूरे विश्व की नजर मालदीव चुनावों पर है। चुनाव नतीजे और कुछ नहीं वैश्विक संकेत ही हैं। मालदीव की जनता के लिए भी चुनाव नतीजे कम चौंकानेवाले नहीं हैं क्योंकि विपक्षी दल और सालेह समर्थक चुनाव प्रभावित होने की आशंका बार-बार जता रहे थे।

पिछले वर्ष यामीन सरकार ने न सिर्फ भारत के प्रति बेहद तल्ख रवैया दिखाया, बल्कि नई दिल्ली के लिए सुरक्षा के लिहाज से भी खतरा बनते दिखे।

चीन के साथ एक के बाद एक कई समझौते कर रही यामीन सरकार ने हिंद महासागर क्षेत्र में भारत के लिए चिंता की कई वजहें दी थीं। भारत में मालदीव के राजदूत अहमद मोहम्मद ने कहा, इतिहास ने साबित किया है कि बहुत सी चीजों के लिए हम एक-दूसरे पर आरोप लगाते रहे हैं, लेकिन हम लोकतंत्र में यकीन करते हैं। परिणाम चाहे हमारे मन मुताबिक न रहे हों, लेकिन हमने फैसले का सम्मान किया।

प्रेजिडेंट मौमून अब्दुल गय्यूम ने 30 साल तक देश पर शासन किया, लेकिन उन्होंने ही देश में लोकतांत्रिक सरकार चुने जाने की व्यवस्था की। मोहम्मद को यामीन का करीबी माना जाता है और जल्द ही वह वतन वापस लौटकर विपक्षी पार्टी की भूमिका निभाएंगे।

संयुक्त विपक्ष को समर्थन देने के लिए पूर्व राष्ट्रपति नशीद ने भी भारत का शुक्रिया अदा किया। नशीद ने आगे कहा, ‘मैं इस बात को लेकर आशान्वित हूं कि हाल में श्रीलंका और मलयेशिया जैसे देशों में जो हुआ, उसे देखते हुए चीन यह समझेगा कि ऐसा क्यों किया जा रहा है। मालदीव की नई सरकार यामीन के कार्यकाल में शुरू हुए सभी इन्फ्रास्ट्रक्चर प्रॉजेक्ट्स का ऑडिट कराएगी। दरअसल, चीन पर जमीन हड़पने और कई तरह के गंभीर आरोप लगे हैं। ‘

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