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निर्भया केस: दोषियों की क्यूरेटिव पिटीशन पर 14 जनवरी को सुनवाई

निर्भया केस में दोषी विनय शर्मा और मुकेश द्वारा दायर की गई क्यूरेटिव पिटिशन (सुधारात्मक याचिका) की सुनवाई 14 जनवरी को शीर्ष अदालत की पांच जजों की पीठ करेगी। इस पीठ में जस्टिस एनवी रमना, अरुण मिश्रा, आरएफ नरीमन, आर बनुमथी और अशोक भूषण शामिल होंगे।

क्या होता है क्यूरेटिव पिटीशन?

क्यूरेटिव पिटीशन एक कानूनी शब्द है। यह तब दाखिल किया जाता है, जब किसी दोषी की राष्ट्रपति के पास भेजी गई दया याचिका और सुप्रीम कोर्ट में पुनर्विचार याचिका खारिज कर दी जाती है। ऐसे में क्यूरेटिव पिटीशन दोषी के पास मौजूद अंतिम मौका होता है, जिसके द्वारा वह अपने लिए निर्धारित की गई सजा में नरमी की गुहार लगा सकता या सकती है। क्यूरेटिव पिटीशन किसी भी मामले में कोर्ट में सुनवाई का अंतिम चरण होता है। इसमें फैसला आने के बाद दोषी किसी भी प्रकार की कानूनी सहायता नहीं ले सकता है।

याकूब मेमन मामले में स्वीकारी गई थी क्यूरेटिव पिटीशन

1993 के मुंबई ब्लास्ट में दोषी ठहराए गए याकूब मेमन की दया याचिका राष्ट्रपति द्वारा खारिज करने के बाद भी सुप्रीम कोर्ट ने क्यूरेटिव पिटीशन पर सुनवाई करने की मांग स्वीकार की थी। तब सुप्रीम कोर्ट आधी रात तक याकूब की फांसी की आखिरी याचिका पर सुनवाई करता रहा था। हालांकि, बाद में उसकी फांसी की सजा को कोर्ट ने बरकरार रखा था।

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