देश

नगालैंड: संघर्ष के बाद अब महिलाओं को भी मिल रहा जायदाद में हिस्सा

कोहिमा: नगा महिलाओं ने पितृसत्तात्मक सत्ता के खिलाफ यहां सदियों लंबा संघर्ष किया और आखिरकार वह उस नजरिए को बदलने में कामयाब रहीं, जिसने उन्हें पिता की जायदाद और संपत्ति में हिस्सेदार बनने से रोक रखा था। सालों से चले आ रहे इस शांत संघर्ष के बाद अब लोग अपनी जायदाद में बेटियों को भी हिस्सेदार मानने लगे हैं और वसीयत जैसे दस्तावेजों में भी उनका नाम लिखा जाने लगा है।

कोहिमा की अडिशनल डेप्युटी कमिश्नर टीएल कियुसुमो तिखिर ने कहा, नगालैंड के शहरी इलाकों में यह चलन काफी बढ़ा है और माता-पिता अपनी वसीयत और जमीन-जायदाद बेटियों के नाम करने लगे हैं। पहले ऐसा बहुत कम देखने-सुनने को मिलता था। लड़कियों को जो जमीन गिफ्ट में दी जा सकती है, वह अर्जित की हुई संपत्ति होनी चाहिए। पैतृक जमीन अलग जनजाति के लोगों को नहीं ट्रांसफर की जा सकती है और ना ही बेटियों को दी जा सकती है।

ऐसा इसलिए क्योंकि बेटियां हो सकता है किसी और जनजाति में शादी कर लें जिससे उनके गांव का एरिया कम होगा और यह नगाओं को बिल्कुल भी मंजूर नहीं है। दूसरी तरफ अर्जित की गई भूमि अधिकतर शहरी इलाकों में होती है और वह जनजातियों की जमीन पर असर नहीं डालती है। नगालैंड में भूमि के अधिकार से जुड़े मसले हमेशा से बड़ा मुद्दा रहे हैं। नगा सोशल ऐक्टिविस्ट और तंगखुल एक्सपर्ट एस वाराह ने कहा, ‘नगाओं के लिए जमीन उनकी पहचान है। नगाओं के गांवों में उनके पूर्वज दफ्न होते हैं। इसीलिए वह अपने गांव की जमीन से कभी समझौता नहीं कर सकते।

Tags
Show More

Related Articles

Close
Close