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महाराष्ट्र पुलिस ने बताया- फोन में खुद से जुड़ा है आधार हेल्पलाइन नंबर तो तुरंत करें डिलेट

मुंबई: लोगों के मोबाइल फोन में उनकी जानकारी के बिना आधार यानी भारतीय विशिष्ट पहचान प्राधिकरण (UIDAI) के नाम से एक टोल फ्री हेल्पलाइन नंबर जुड़ने का मामला गर्माया हुआ। कई लोग इसे लेकर हैरान हैं और निजता के उल्लंघन या हैकिंग की आशंका व्यक्त कर रहे हैं। ऐसे में महाराष्ट्र पुलिस के साइबर सुरक्षा सेल ने देर शाम एडवायजरी जारी की है कि अगर यूआईडीएआई के नाम से कोई नंबर अपने आप मोबाइल फोन में जुड़ जाए तो इसे डिलीट किया जाए।

कुछ मोबाइल फोन्स में यूजर्स की मंजूरी के बिना आधार हेल्पलाइन नंबर पहले से सेव होने को लेकर गुस्से के बीच गूगल ने रात एंड्रायड फोन्स के ‘सेटअप विजार्ड’ में पुराना यूआईडीएआई हेल्पलाइन नंबर और 112 हेल्पलाइन नंबर ‘गलती से’ लोड हो जाने पर माफी मांगी। गूगल ने कहा कि नंबरों को फोन से डिलीट किया जा सकता है।

उसने इस दिक्कत को खत्म करने का भी वादा किया। जब लोगों ने अपना एंड्रायड फोन चेक किया, तो खुद ब खुद सेव हो रखे एक नंबर से उनके होश उड़ गए। लोगों की आलोचनाओं के बीच UIDAI ने कहा कि एंड्राएड फोन के कॉन्‍टेक्‍ट लिस्‍ट में पहले से उपलब्‍ध नंबर 1800-300-1947 नंबर गलत है। UIDAI ने बयान जारी कर कहा है कि उसने किसी भी फोन ऑपरेटर या निर्माता को ऐसी इजाज़त नहीं दी है। UIDAI ने ये भी बताया है कि ये कंपनियां उसका पुराना टोल फ्री नंबर 1800-300-1947 चला रही हैं जो वैध नहीं है।

इसके बाद ट्विटर पर #UIDAI ट्रेंड करने लगा और स्मार्टफोन यूजर्स अपना स्क्रीन शॉट लगाकर खुद की निजता को लेकर चिंता जाहिर करने लगे। एक यूजर ने सेव्ड नंबर का स्क्रीन शॉट ट्वीट करते हुए लिखा, ‘यह कोई मज़ाक नहीं है। मेरे फोन में भी ऐसा हुआ है।

मैंने इस नंबर को सेव नहीं किया था। जल्दी से अपना फोन भी चेक करें, मुझे चिंता हो रही है। एक फ्रांसीसी सुरक्षा विशेषज्ञ एलियट एल्डरसन ने यूआईडीएआई से ट्विटर पर पूछा, ‘कई लोग, जिनके अलग-अलग सेवा प्रदाता है, चाहे उनके पास आधार कार्ड हो या ना हो या उन्होंने आधार एप इंस्टाल किया है या नहीं किया है। उन्होंने अपने फोन में नोटिस किया होगा कि बिना अपने कॉन्टैक्ट लिस्ट में जोड़े आधार का हेल्पलाइन नंबर क्यों आ रहा है?

क्या आप इसकी सफाई दे सकते हैं, क्यों? सेलुलर ऑपरेटर्स एसोसिएशन ऑफ इंडिया (सीओएआई) ने एक बयान में कहा, ‘कई सारे मोबाइल हैंडसेट्स के फोनबुक में कुछ अज्ञात नंबर के सेव हो जाने में दूरसंचार सेवा प्रदाताओं की कोई भूमिका नहीं है। टेलीकॉम कंपनियों ने इस मुद्दे पर किसी प्रकार का बयान देने से इनकार कर दिया और कहा कि उनका भी यही कहना है, जो सीओएआई ने कहा है।

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