देशराजनीति

मिशन 2019 के लिए धीरे-धीरे टीम ‘B’ की और बढ़ रही भाजपा

नई दिल्ली: राज्यसभा में उप-सभापति के चुनाव के बाद राजनीतिक समीकरण तेजी से बदल रहे हैं। जिस तरह से उप-सभापति के लिए हुई वोटिंग में राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (NDA) के सहयोगी दल आपसी मतभेद को भुलाकर एक साथ आए और एनडीए केंडिडेट हरिवंश नारायण सिंह को समर्थन दिया, उसे आने वाले लोकसभा चुनाव के मद्देनज़र एनडीए के लिए ‘गुड न्यूज़’ माना जा रहा है। बदलते राजनीतिक समीकरण राष्ट्रीय दलों के लिए भी आगे जाकर फायदेमंद साबित होने वाले हैं।
ये राजनीतिक समीकरण एनडीए का नेतृत्व कर रही बीजेपी के भी पक्ष में हैं।

बीजेपी को यह तय करने में मदद मिल रही है कि उसे मौजूदा घटक दलों के साथ गठबंधन को बरकरार रखना चाहिए या फिर नई संभावनाएं देखनी चाहिए। वैसा देखा जाए, तो बीजेपी को फिलहाल नई संभावनाएं देखने की जरूरत नहीं है। क्योंकि, बीजेपी और एनडीए के सहयोगी दलों के बीच धीरे-धीरे ही सही फासले कम हो रहे हैं। आने वाले चुनावों के मद्देनज़र एनडीए के घटक दल आपसी मनमुटाव को भुलाकर एकजुट होते दिख रहे हैं।

बीजेपी से इतर बीजेपी की टीम ‘बी’ बन रही है।

राष्ट्रीय राजनीति के साथ-साथ क्षेत्रीय राजनीति में भी यह चीज़ देखी जा सकती है। राज्यों में एक-दूसरे की विरोधी पार्टियां राष्ट्रीय स्तर पर एक-दूसरे की दोस्त बनने की इच्छुक है। क्योंकि, इस साल के आखिर तक मध्य प्रदेश, राजस्थान और छत्तीसगढ़ में विधानसभा चुनाव होने हैं और सभी पार्टियों को राजनीतिक फायदा चाहिए।

तीन क्षेत्रीय पार्टियां बीजू जनता दल (BJD), तेलंगाना राष्ट्र समिति (TRS) और वाईएसआर कांग्रेस (YSR) राजनीतिक परिपेक्ष्य में बीजेपी के लिए सशक्त सहयोगी दल बनकर उभर रहे हैं। अगर 2019 के चुनाव में चीजें बीजेपी के पक्ष में नहीं रहीं और नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में एनडीए 273 सीटें जीतने में नाकाम रही, तो यही वो तीन पार्टियां हैं, जो भगवा पार्टी को केंद्र में वापस ला सकती है। राज्यसभा के उप-सभापति चुनाव में इसकी एक झलक देखने को भी मिल चुकी है। ये दल एनडीए से बाहर हैं, लेकिन फिर भी इन्होंने एनडीए कैंडिडेट के समर्थन में वोट किया था।

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