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कोर्ट जाने वाले अधिकारी खुद उठाएं केस का खर्च

नई दिल्ली: दिल्ली विधानसभा में प्रस्ताव पास कर सरकार को निर्देश दिया गया कि जो अधिकारी विधानसभा, इसकी कमिटियों और स्पीकर के फैसलों के खिलाफ कोर्ट जाते हैं, तो उन अधिकारियों को मुकदमे का खर्च खुद ही उठाना होगा। अधिकारियों द्वारा किए जाने वाले मुकदमे में वकीलों की फीस सरकार को नहीं देनी चाहिए।

प्रस्तावक में हा गया कि सरकार का बजट विधानसभा पास करती है और अगर कोई ऑफिसर विधानसभा की कमिटियों के खिलाफ ही कोर्ट जाता है

फिर सरकार को उन मुकदमों का खर्च नहीं उठाना चाहिए। यह भी कहा गया कि अगर कोई सीनियर अधिकारी सदन की कमिटियों या स्पीकर के फैसलों को चुनौती देने के लिए अगर कोई सीनियर अधिकारी इजाजत देता है तो मुकदमे का खर्च अधिकारी से वसूला जाए। अगर मिनिस्टर या कोई अथॉरिटी इजाजत देते हैं तो फिर यह रकम उनसे रिकवर की जाए।

प्रस्ताव में कहा गया कि दिल्ली में कुछ आईएएस ऑफिसर्स में दिल्ली विधानसभा और इसकी कमिटियों की शक्तियों, विशेषाधिकारों और प्रक्रियाओं को चुनौती देने का ट्रेंड देखा जा रहा है। यह भी देखा जा रहा है ये अधिकारी कमिटी के सदस्यों पर पक्षपातपूर्ण व्यवहार का आरोप लगा रहे हैं। प्रस्ताव में कहा गया कि अधिकारियों के इस तरह के बर्ताव को किसी भी लिहाज से उचित नहीं ठहराया जा सकता और सरकार को इस मसले पर एक्शन लेना चाहिए।

साथ ही सरकार को सदन के फैसले को चुनौती देने की इजाजत किसी अधिकारी को नहीं देनी चाहिए। यह प्रस्ताव सदन में पास हो गया। इस मसले पर दिल्ली के मंत्री सत्येंद्र जैन ने कहा कि सदन के निर्देशों के मुताबिक सरकार फैसले लेगी। उन्होंने कहा कि सरकार का बजट भी विधानसभा पास करती है और विधानसभा के फैसलों को चुनौती देने को जायज नहीं ठहराया जा सकता।

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