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लखनऊ और नोएडा में लागू होगा कमिश्नर सिस्टम


उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ और राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली (एनसीआर) से सटे हुए नोएडा में पुलिस कमिश्नर सिस्टम लागू होगा। मुख्यमंत्री आवास पर हुई बैठक में प्रस्ताव पर मुहर लग गई है। सूत्रों के मुताबिक, डीजीपी ओपी सिंह और अपर मुख्य सचिव गृह अवनीश कुमार अवस्थी के साथ एक घंटे से अधिक चली बैठक में मुंबई व गुड़गांव में लागू पुलिस कमिश्नर प्रणाली के मॉडल पर चर्चा की गई।

हालांकि, पुलिस कमिश्नर प्रणाली लागू करने के प्रस्ताव को कैबिनेट में लाना जरूरी है लेकिन लखनऊ और नोएडा में वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक का पद दो दिनों से खाली है। कैबिनेट की बैठक मंगलवार को प्रस्तावित है। इसलिए बाई सर्कुलेशन पुलिस कमिश्नर प्रणाली लागू करने के प्रस्ताव को मंजूरी दिए जाने पर भी चर्चा की गई है। इस मौके पर मुख्यमंत्री के प्रमुख सचिव एसपी गोयल भी मौजूद थे।

दो दिन में 8 बार सीएम ने की बैठक

सूत्रों ने बताया कि पुलिस कमिश्नर प्रणाली लागू करने के मुद्दे पर मुख्यमंत्री और पुलिस महानिदेशक के बीच बृहस्पतिवार से शुक्रवार के बीच करीब 8 बार बैठक हुई है। मुख्यमंत्री ने इस प्रणाली से जुड़े एक-एक बिंदु पर जानकारी ली है।

पुलिस कमिश्नर को मिलती है मजिस्ट्रेट की पॉवर

भारतीय पुलिस अधिनियम 1861 के भाग 4 के अंतर्गत जिलाधिकारी यानी डिस्ट्रिक मजिस्ट्रेट के पास पुलिस पर नियत्रंण के अधिकार भी होते हैं। इस पद पर आसीन अधिकारी IAS होता है लेकिन पुलिस कमिश्नरी सिस्टम लागू हो जाने के बाद ये अधिकार पुलिस अफसर को मिल जाते हैं, जो एक IPS होता है। यानी जिले की बागडोर संभालने वाले डीएम के बहुत से अधिकार पुलिस कमिश्नर के पास चले जाते हैं।

कमिश्नर के पास होते हैं कई अहम अधिकार

दण्ड प्रक्रिया संहिता (CRPC) के तहत एक्जीक्यूटिव मजिस्ट्रेट (Executive Magistrate) को भी कानून और व्यवस्था को विनियमित करने के लिए कुछ शक्तियां मिलती है। इसी की वजह से पुलिस अधिकारी सीधे कोई फैसला लेने के लिए स्वतंत्र नहीं हैं, वे आकस्मिक परिस्थितियों में डीएम या कमिश्नर या फिर शासन के आदेश के तहत ही कार्य करते हैं, लेकिन पुलिस कमिश्नरी प्रणाली में IPC और CRPC के कई महत्वपूर्ण अधिकार पुलिस कमिश्नर को मिल जाते हैं।

प्रतिबंधात्मक कार्रवाई का अधिकार

पुलिस कमिश्नर प्रणाली में पुलिस कमिश्नर सर्वोच्च पद होता है। ज्यादातर यह प्रणाली महानगरों में लागू की गई है। पुलिस कमिश्नर को ज्यूडिशियल पॉवर भी होती हैं। सीआरपीसी के तहत कई अधिकार इस पद को मजबूत बनाते हैं। इस प्रणाली में प्रतिबंधात्मक कार्रवाई के लिए पुलिस ही मजिस्ट्रेट पॉवर का इस्तेमाल करती है। एक हरियाणा के एक वरिष्ठ पुलिस अधिकारी के मुताबिक पुलिस प्रतिबंधात्मक कार्रवाई का अधिकार मिलने से अपराधियों को खौफ होता है। क्राइम रेट भी कम होता है।