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अमृतसर रावन दहन ट्रेन हादसा आखिर जिम्मेवार कौन..? रेल या सरकार…?


पंजाब के अमृतसर में रावण दहन के दौरान ट्रेन हादसे में मरनेवालो की संख्या 50 से भी ज्यादा बताई जा रही है। एक मंत्री की बीवी हादसे के बाद वह से भाग निकली होने की खबर भी है। वह निंदनीय है।

हादसा जिस प्रकार से हुवा है उसे देखते हुवे केंद्र सरकार और रेल मंत्रालय गाइड लाइन तैयार करनी चाहिए ताकि भविष्य में ऐसी दुर्घटना न हो। इस हादसे में स्थानीय प्रशासन के साथ साथ रेलवे की भी सबसे बड़ी गलती दिखाई दे रही है। माना की रात का वक्त था मगर रेल पटरी पर खड़े लोग इंजिन ड्राइवर को इंजिन की बड़ी और दूर तक प्रकाश फैलानेवाली लाईट में क्यों नहीं दिखाई दीये ? बस्ती से गुजर रही ट्रेन की स्पीड कितनी होनी चाहिए?

जिस ट्रेन ने लोगो को रौंदा उसकी स्पीड प्रति घंटा 100 की.मी. की होने की खबर है। ट्रेन ने हालांकि सीटी बजाई लेकिन रावण दहन के पटाखों की आवाज में दब गई। रावण को जलाते ही उसमे से निकलते पटाखों से बचने के लिए लोग पटरी की और भागे। और उसी वक्त ट्रेन का आना हुवा।

इन सब को देखते हुवे रेल और स्थानीय प्रशासन के खिलाफ कार्यवाई होनी चाहिए। इतने बड़े रावण दहन के वक्त आग लगने की कोई दुर्घटना न हो उसके इंतजाम भी नहीं थे। मौके पर दमकल और एम्बुलैंस की एक भी गाडी मौजूद नहीं थी। रावण दहन हर वर्ष सभी जगह होता है। जाहिर है की दहन में आग तो लगनी है। पटाखों से भरे रावण के पुतले में आग लगने से कोई भी हादसा हो सकता है।

ऐसे में स्थानीय तौर पर मौके की जगह दमकल की गाड़ियां और एम्बुलैंस की व्यवस्था अनिवार्य होनी चाहिए। वीवीआईपी के साथ मेडिकल टीम, दमकल की गाडी बिना वजह दौड़ाने से तो अच्छा है की साल में एक बार रावण दहन के दिन लोगो की सुरक्षा के लिए इंतजाम होने चाहिए। यदि इस हादसे के वक्त सरकार ने थोड़ी सी भी चिंता की होती तो शायद कई लोग बच सकते थे।

केंद्र सरकार गाइड लाइन बनाए की रेल पटरी के निकट और राजमार्ग के निकट कही भी रावण दहन न हो। खुल्ले मैदान में दहन हो ताकि वहां किसी हादसे के वक्त लोग दौड़ कर अपनी जान बचा सके। रावण के पुतले की उंचाई भी तय करे। बड़े और भारी वजनदार पुतले गिरने की आशंका को खारिज नहीं कर सकते। ऐसे उत्सव के मौके परकोई मंत्री भी हाजिर हो ताकि उनकी सुरक्षा के बहाने पुलिस और स्थानीय प्रशासन मौजूद हो। रावण दहन के स्थान के निकट दमकल की गाड़ियां होनी ही चाहिए।

भीड़ को नियंत्रित करने के लिए पुलिस की व्यवस्था हो। किसी भी हाल में रेल पटरी के निकट और जो पटरिया बस्ती से हो कर गुजरती है उसके इर्दगिर्द किसी भी हालत में ऐसे उत्सव की मंजूरी न हो। ताकि ऐसी दुर्घटना को रोका जाय। हर घटना दुर्घटना इंसान को एक सबक सिखाती है। अमृतसर की दुर्घटना का सबक ये है की रेल पटरी के निकट किसी भी हाल में कही भी ऐसे उत्सव न हो। केंद्र और रेल मंत्रालय जल्द से जल्द गाइड लाइन बनाये और उसका कडा अमल हो ऐसे प्रशासनिक कदम ले।