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यौन शोषण पीड़ितों के लिए अच्छी पहल,एम्स में मिलेगी यह खास सुविधा,मंत्रालय को भेजा प्रस्ताव

अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (एम्स) ऐसी सुविधा शुरू करने जा रहा है जिसमें कि यौन शोषण पीड़िताओं को सभी तरह का इलाज ,शारीरिक प्रशिक्षण, चोट, फोरेंसिक टेस्ट, डीएनए प्रोफिलिंग, साइकोलॉजिकल (मनोवैज्ञानिक) और साइकेट्रिक (मानसिक रोग) देखभाल मिलेगी। इस प्रस्ताव को एम्स ने केंद्रीय महिला एवं बाल विकास मंत्रालय के पास मंजूरी के लिए भेजा है। अब इसका केंद्रीय स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय रिव्यू कर रहा है।

एम्स के फोरेंसिक मेडिसिन के विभागाध्यक्ष डॉक्टर सुधीर गुप्ता ने कहा, ‘महिलाओं को शारीरिक प्रशिक्षण, साइकेट्रिस्ट और काउंसिलिंग की जरूरत होती है।’ शुरुआती पांच सालों में केंद्र की स्थापना और परिचालन की लागत पर 40 करोड़ रुपये खर्च होंगे। जिसमें 10 डॉक्टरों, डीएनए लैब के दो वैज्ञानिकों, छह तकनीकियों, आठ महिला नर्स और दो डाटा एंट्री शामिल होंगे।

प्रस्ताव के अनुसार, यह केंद्र अस्पताल के फोरेंसिक विभाग में स्थित होगा और इसमें चौबीस घंटे रिसेप्शन और परीक्षा कक्ष होगा। गुप्ता ने कहा कि एक बार यह केंद्र तैयार हो जाएगा तो एम्स देश के अन्य हिस्सों में भी इसी तरह की इकाइयां स्थापित करने के लिए एक नोडल एजेंसी की भूमिका निभाएगा।

दिल्ली पुलिस के अतिरिक्त जनसंपर्क अधिकारी अनिल कुमार ने कहा, ‘हम इस पहल का स्वागत करते हैं। फोरेंसिक सबूत काफी महत्वपूर्ण होते हैं और जल्द ही फॉरेंसिक रिपोर्ट मिलने से महिलाओं के खिलाफ होने वाले अपराध के मामलों में तेजी से जांच और शिकायतकर्ताओं को न्याय प्रदान करने में मदद मिलेगी। महिलाओं के खिलाफ होने वाले अपराध दुष्कर्म और अन्य अपराधों की घटनाओं को हल करने के लिए अधिकतम ध्यान दिया जाता है। ऐसे मामलों में 63 प्रतिशत आरोपियों को पहले हफ्ते में गिरफ्तार कर लिया जाता है।’

आपको बता दें कि यह केंद्र जघन्य अपराधों का शिकार हुई महिलाओं पर कुछ बोझ को कम करेगा | वहीं 2016 के राष्ट्रीय अपराध रिकॉर्ड ब्यूरो के आंकड़ों के अनुसार दिल्ली में रोजाना छह दुष्कर्म और कई यौन शोषण के मामले सामने आते हैं।

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