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26 साल बाद पटरी पर दौड़ेगी छुक-छुक करती रेल, अकबर भी रचेगा इतिहास

नई दिल्ली: भाप इंजनों के रोमांच को बनाए रखने के लिए रेलवे की ओर से लगातार प्रयास किए जा रहे हैं। अब एक ऐसे भाप इंजन को फिर से पटरियों पर लाने की तैयारी हो रही है जो 26 सालों से कबाड़ बनकर खड़ा हुआ था। महाराष्ट्र के भुसावल में खड़े इस भाप इंजन को मरम्मत के लिए बीस दिन पहले रेवाड़ी स्थित स्टीम हेरीटेज लोकोशेड में लाया गया है। यहां इसकी मरम्मत का कार्य चल रहा है। यह इंजन निकट भविष्य में रेवाड़ी-दिल्ली कैंट व दिल्ली कैंट-गुरुग्राम-फरुखनगर जैसे रूटों पर प्रस्तावित पर्यटक ट्रेन का सारथी बनेगा।

दिल्ली-कैंट से अलवर के बीच दौड़ने वाली सुप्रसिद्ध फेयरी क्वीन के लिए भी यह इंजन विकल्प बनेगा।
भाप इंजन डब्ल्यूजी-10253 को वर्ष 1955 में बनाया गया था। यह भाप इंजन वर्ष 1992 में आखिरी बार पटरियों पर दौड़ा था। इसके बाद इसे भुसावल में ले जाकर खड़ा कर दिया गया। 26 सालों से इंजन वहीं पर खड़ा हुआ था। उत्तर रेलवे की टीम ने सितंबर 2017 में भुसावल में इस इंजन का निरीक्षण किया था। निरीक्षण के बाद निर्णय लिया गया कि इस इंजन को फिर से पटरियों पर दौड़ाया जाएगा। इंजन को मरम्मत के लिए रेवाड़ी लोकोशेड लाया गया है तथा यहां विशेषज्ञों की टीम इसे ठीक करने में जुटी हुई है। इंजन के विभिन्न हिस्से सस्पेंशन, बैरिंग व पहियों को लेकर काम किया जा रहा है।

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