कोरोनाकाल में Theater Artist का संघर्ष, दिसम्बर तक करना होगा इंतजार


पिछले करीब तीन महीनों से कोविड महामारी (Corona Virus) और लॉकडाउन (Lockdown) की वजह से कई लोग अपनी रोजी-रोटी के लिए संघर्ष कर रहे हैं. ऐसे में देश भर के सभी थियेटर कलाकारों (Theater Artist) का काम ठप हो गया है.


कोरोनाकाल में Theater Artists का संघर्ष, दिसम्बर तक करना होगा इंतज़ार

कोरोनाकाल में Theater Artists का संघर्ष, दिसम्बर तक करना होगा इंतज़ार


लखनऊ : पिछले करीब तीन महीनों से कोविड महामारी (Corona Virus) और लॉकडाउन (Lockdown) की वजह से कई लोग अपनी रोजी-रोटी के लिए संघर्ष कर रहे हैं. ऐसे में देश भर के सभी थियेटर कलाकारों (Theater Artist) का काम ठप हो गया है. 25 मार्च को देश भर में लॉकडाउन की शुरुआत के वक्त कलाकरों ने यह सोच कर खुद को संतुष्ट कर लिया कि केवल 21 दोनों की बात है. लेकिन उसके बाद लगातार तीन महीने के लॉकडाउन ने उनका सबकुछ मानो लॉक कर दिया हो.

रंगमंच पर अभी भी पाबंदी

ऐसे में अनलॉक1 (Unlock1) की प्रक्रिया के वक्त कलाकारों के लिए उम्मीद जगी कि धीरे-धीरे सबकुछ पटरी पर लौट आएगा, लेकिन अभी तक रंगमंच पर पाबंदी जारी है. एक रिपोर्ट के अनुसार, देश के चार बड़े शहर भोपाल, जयपुर, पटना और रायपुर के कलाकरों ने बातचीत के दौरान बताया लॉकडाउन से लेकर अनलॉक तक सभी छोटे कलाकारों को किस तरह से परिस्तिथियों का सामना करना पड़ा.

दिसंबर तक इंतजार करना पड़ेगा इंतज़ार

भोपाल के वरिष्ठ थियेटर आर्टिस्ट केजी त्रिवेदी कहते हैं कि ‘थियेटर एक नशा है, हम इसके एडिक्ट हो चुके हैं. शाम को 6 बजता है तो हमारे हाथ-पैर कुलबुलाने लगते हैं. लगता है हमें कुछ करना चाहिए. वे कहते हैं कि लॉकडाउन जरूर है, लेकिन काम बंद नहीं है, काम उस दिन बंद होगा, जिस दिन ब्रेन बंद हो जाएगा. आगे वे कहते हैं कि हमें थिएटर शुरू करने के लिए दिसंबर तक इंतजार करना पड़ेगा. तब तक हम अपना प्रोडक्शन तैयार कर रहे हैं. कोरोनाकाल के बाद थिएटर भी पहले की तरह नहीं रह जाएगा. पहले हमारी एक्टिंग टीम में 60-70 कलाकार होते थे, अब तीन-चार तक सीमित रखना पड़ेगा.

जयपुर के साबिर खान पिछले 45 साल से रंगमंच से जुड़े हैं। वे कहते हैं कि थियेटर हमारी जिंदगी है, इसमें हमारी आत्मा बसती हैं, हम कभी इससे अलग होने का सोच भी नहीं सकते हैं, लेकिन लॉकडाउन की वजह से हमारा हाल दिहाड़ी मजदूरों से भी बदतर हो गया है. उधार लेकर घर का खर्च चल रहा है। सरकार ने वादे तो बहुत किए लेकिन किसी को कई आर्थिक मदद नहीं मिली.

डिजिटल प्लेटफार्म का करेंगे इस्तेमाल

ब्रह्मपुरी के थियेटर आर्टिस्ट विशाल भट्‌ट 20 साल से इस प्रोफेशन से जुड़े हुए हैं. उनके परिवार के कई सदस्य भी इसका हिस्सा रह चुके हैं, लेकिन कभी किसी को ऐसे हालात का सामना नहीं करना पड़ा. उन्होंने बताया कि सरकार की तरफ से कलाकारों के लिए डिजिटल प्लेटफॉर्म (Digital Platorm) बनाने और एक फिक्स अमाउंट देने की बात कही गई थी. लेकिन, अभी तक किसी को यह पता नहीं है कि किसके वीडियो सिलेक्ट हुए या किसको कितनी मदद मिली. वे बताते हैं कि कोरोना ने हमें यह सिखाया कि कलाकार के पास दूसरे सोर्स भी होने चाहिए. अब आर्टिस्ट थिएटर के बजाए डिजिटल प्लेटफार्म पर जा रहे हैं. जहां वे अपनी एक्टिंग के वीडियो डाल रहे हैं और थोड़ा- बहुत कमा रहे हैं.

पहली बार थिएटर का इतना बुरा हाल

रायपुर के राजकमल नायक, करीब 50 सालों से थियेटर से जुड़े हैं. वे मशहूर निर्देशक (Director) हैं और संगीत नाटक अकादमी सम्मान भी पा चुके हैं. वे बताते हैं कि देश में करीब 6 करोड़ कलाकार थिएटर से जुड़े हैं. लॉकडाउन की वजह से आर्थिक स्थिति (Financial Status) खराब हो गई है, गुजारा करना भी मुश्किल हो गया है. मैंने 50 साल के करियर में कभी थिएटर का इतना बुरा हाल नहीं देखा. रंगमंच की रौनक कब तक लौटेगी कहा नहीं जा सकता है, कम से कम आठ महीने का वक्त तो लगेगा ही.