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जानें कब और क्यों मनाया जाता है धनतेरस?


 

भारत एक ऐसा देश है जहाँ विभिन्न धर्मों व सम्प्रदायों को मानने वाले लोग रहते हैं। इसलिए यहाँ मनाये जाने वाले त्योहार भी अनेक हैं। प्रत्येक त्योहारों का अपना ही महत्व है। इन्हीं त्योहारों में से एक पर्व है दीपावली का जिसके आते ही हर घर, हर शहर दीयों से जगमगा उठता है। बचपन से लेकर आज तक हम सिर्फ दीपावली मनाने का कारण ही जानते आ रहे हैं कि श्रीरामचन्द्र जी चौदह वर्ष का वनवास काटकर तथा रावण और उसकी लंका का संहार कर अयोध्या लौटे थे इसलिए दीपावली का पर्व मनाया जाता है। पर दीपावली से दो दिन पहले मनाये जाने वाले त्योहार धनतेरस के पीछे का कारण क्या आपने कभी सोचा है?

कार्तिक कृष्ण पक्ष की त्रयोदशी तिथि के दिन भगवान धन्वंतरि का जन्म हुआ था इसलिए इस तिथि को धनतेरस या धनत्रयोदशी के नाम से जाना जाता है। कहते हैं की भगवान विष्णु ने चिकित्सा और विज्ञानं के विस्तार और प्रसार के लिए धन्वंतरि का अवतार लिया था।

समुद्र मंथन के दौरान भगवान धन्वंतरि अपने हाथों में अमृत से भरा कलश लेकर प्रकट हुए थे। क्यूंकि भगवान् धन्वंतरि कलश लेकर प्रकट हुए थे इसलिए इस अवसर पर बर्तन खरीदने की परंपरा है।

धनतेरस के दिन चांदी खरीदने की भी प्रथा है जिसके संभव ना होने पर लोग चांदी के बने बर्तन खरीदते हैं। इसके पीछे का कारण माना जाता है की यह चन्द्रमा का प्रतीक है जो शीतलता प्रदान करता है और मन में संतोष रुपी धन का वास होता है। संतोष को सबसे बड़ा धन कहा गया है। जिसके पास संतोष है वह स्वस्थ है , सुखी है और वही सबसे बड़ा धनवान है।
धनतेरस के दिन भगवान् धन्वंतरि ,माँ लक्ष्मी , भगवान कुबेर और यमराज की पूजा का विधान है।

इस दिन माँ लक्ष्मी के छोटे छोटे पद चिन्हों को पूरे घर में स्थापित करना शुभ माना जाता है। मान्यता है की धनतेरस के दिन संध्या काल में घर के द्वार पर दक्षिण दिशा में दीपक जलाने से अकाल मृत्यु का योग भी टल जाता है।
शास्त्रों के अनुसार भगवान धन्वंतरि देवताओं के वैद्य हैं। इनकी भक्ति और पूजा से आरोग्य सुख यानी स्वास्थ्य लाभ मिलता है। इस दिन धन सम्पन्नता के लिए कुबेर की पूजा भी की जाती है।

By: Shrishti Pandey