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जानिए क्या है दशहरा का महत्व और मान्यता

 

शारदीय नवरात्रि के दशवें दिन यानी आश्विन मास की शुक्ल पक्ष की दशमी को देशभर में दशहरे का पर्व मनाया मनाया जाता है और इस बार दशहरा या विजयादशमी का पर्व 08 अक्टूबर को मनाया जाएगा। पौराणिक कथाओं के अनुसार, दशहरे के दिन ही भगवान राम ने लंका के राजा निशाचर रावण का वध किया था और इसी की खुशी में दशमी तिथि को विजयादशमी के पर्व के रूप में मनाया जाता है। युद्द में विजय के कारण और पांडवों जुड़ी एक कथा के कारण विजयदशमी को हथियार (अस्त्र-शस्त्र) पूजने की परंपरा भी है।

बता दें कि बहुत सी जगहों पर तो दशहरे के दिन रावण दहन का विशाल आयोजन होता है। नवरात्रि में शुरू होने वाली रामलीला का मंचन दशमी को यानी दशहरे के दिन रावण के दहन के साथ समाप्त होता है। उत्तर प्रदेश, उत्तराखंड और बिहार समेत पूरे उत्तर भारत में इस दिन आतिशबाजी और एक दूसरे को राम जोहार करने और दोस्त मित्रों के घर जाकर गले मिलने की परंपरा भी है। कुछ लोग दशहरा को पान खाने का सगुन करते हैं। तो कुछ इलाकों में दशहरे का मेला भी आयोजित होता है।

दशहरे को ये काम करने से मिलता हे पुण्य-

मान्यता है कि दशहरे के दिन यदि किसी को नीलकंठ नाम का पक्षी दिख जाए तो काफी शुभ होता है। कहा जाता है कि नीलकंठ भगवान शिव का प्रतीक है जिनके दर्शन से सौभाग्य और पुण्य की प्राप्ति होती है।साथ ही दशहरे के दिन गंगा स्नान करने को भी बहुत महत्वपूर्ण बताया गया है। कहा जाता है कि दशहरे के दिन गंगा स्नान करने का फल कई गुना बढ़ जाता है। इसलिए दशहरे के दिन लोग गंगा या अपने इलाके की पास किसी नदी में स्नान करने जाते हैं।

दशहरे पर करें किसकी पूजा और क्या मिलेगा लाभ?

इस दिन महिषासुर मर्दिनी मां दुर्गा और भगवान राम की पूजा करनी चाहिए। साथ ही इससे सम्पूर्ण बाधाओं का नाश होगा और जीवन में विजय श्री प्राप्त होगी। इस दिन अस्त्र शस्त्र की पूजा करने से उस अस्त्र-शस्त्र से नुकसान नहीं होता है और आज के दिन मां की पूजा करके आप किसी भी नए कार्य की शुरुआत कर सकते हैं। नवग्रहों को नियंत्रित करने के लिए भी दशहरे की पूजा अदभुत होती है।

विजय प्राप्ति के लिए किस मंत्र का जाप करें?

“श्रियं रामं , जयं रामं, द्विर्जयम राममीरयेत।

त्रयोदशाक्षरो मन्त्रः, सर्वसिद्धिकरः स्थितः।।”

 

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