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Birthday Special : जानें रविशंकर से धर्मगुरु रविशंकर बनने का सफर


विश्व स्तर पर एक आध्यात्मिक नेता एवं मानवतावादी धर्मगुरु रवि शंकर का जन्म आज के दिन यानि 13 मई  1956 को तमिलनाडु में हुआ था इनके पिता वेंकट रत्नम जो भाषाकोविद् और माता विशालाक्षी एक सुशील महिला थीं। आदि शंकराचार्य से प्रेरणा लेते हुए इनके पिता ने इनका नाम रविशंकर’ रखा। रविशंकर बचपन से आध्यात्मिक प्रवृत्ति के थे। सिर्फ चार साल की उम्र में ही श्रीमद्भगवद्गीता के श्लोकों का पाठ करने लगे थे। रविशंकर पहले महर्षि महेश योगी के शिष्य थे। रविशंकर अपनी विद्वता के कारण महेश योगी के प्रिय शिष्य बन गये। रविशंकर ने अपने नाम के आगे श्री श्री’ जोड़ लिया। इसके नाम लेकर प्रख्यात सितार वादक रवि शंकर ने उन पर आरोप लगाया कि वे उनके नाम की कीर्ति का इस्तेमाल कर रहे हैं। रविशंकर ने 1972 में आर्ट ऑफ लिविंग फाउण्डेशन की स्थापना की। ये संस्था शिक्षा और मानवता के प्रचार प्रसार के लिए सशुल्क कार्य करती है। इसके बाद 1979 में इंटरनेशनल एसोसियेशन फार ह्यूमन वैल्यू’ की स्थापना की जिसका उद्देश्य वैश्विक स्तर पर उन मूल्यों को फैलाना है जो लोगों को आपस में जोड़ती है। विश्व व्यापार संगठन पर 2001 में आतंकवादियों ने हमला किया था तब आर्ट ऑफ लिविंग फाउंडेशन ने पूरे न्यूयार्क के लोगों के निःशुल्क तनाव को दूर करने के कोर्स करवाया। 2003 में इराक में युद्ध प्रभावित लोगों को तनाव मुक्ति के उपाय बताए।श्री श्री रवि शंकर को इराक के पी एम ने निमत्रण देकर इराक दौरे के लिए बुलाया तब रवि शंकर ने वहां के  शियासुन्नी तथा कुरदिश समुदाय के नेताओं से बातचीत की।2004 में पाकिस्तान के उन नेताओं से भी मिले जो विश्व शांति स्थापना के पक्षधर थे।