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मौत को महबूबा और आजादी को दुल्हन मानते थे भगत सिंह


  • सरफ़रोशी की तमन्ना अब हमारे दिल में है, देखना है ज़ोर कितना बाज़ु-ए-कातिल में है?
  • वक्त आने दे बता देंगे तुझे ऐ आस्माँ! हम अभी से क्या बतायें क्या हमारे दिल में है?

आज आजादी के उस नायक का जन्मदिन है जिसने मौत को महबूबा और आजादी को दुल्हन माना था, जिसने कफन का सेहरा बांधकर अपनी मां से कहा था मेरा रंग दे बंसती चोला… जी हां हम बात कर रहे हैं भारत मां के सच्चे सपूत भगत सिंह की। चलिए जानते हैं देश के इस वीर जवान के बारे में कुछ खास बातें…

भगत सिंह का जन्म पंजाब के किसान सरदार किशन सिंह के घर हुआ था, इनकी मां का नाम विद्यावती कौर था। जलियांवाला बाग हत्याकांड ने इस सिख लड़के की सोच को ही बदल दिया था। इसी सोच के सहारे भगत सिंह ने भारत की आज़ादी के लिये नौजवान भारत सभा की स्थापना की थी। इसके बाद भगत सिंह पं.चन्द्रशेखर आजाद के साथ उनकी पार्टी हिन्दुस्तान रिपब्लिकन ऐसोसिएशन से जुड़ गये थे। जिसके बाद इस संगठन का नाम हो गया था हिन्दुस्तान सोशलिस्ट रिपब्लिकन एसोसिएशन।

भगत सिंह जब छोटे थे उस समय से ही वह बंदूकों की खेती करने की बातें करते थे। छोटी उम्र से ही उनके मन में ब्रिटिश राज के खिलाफ विद्रोह की आग थी। जलियांवाला बाग घटना के समय भगत सिंह की उम्र सिर्फ 12 वर्ष थी।

उन्‍होंने खून से सनी मिट्टी को एक बोतल में रख लिया था। भगत सिंह रोज इस बोतल की पूजा करते थे। भगत सिंह ने ब्रिटिश राज से लड़ाई के खिलाफ देश को ‘इंकलाब जिंदाबाद’ का नारा दिया था। भगत सिंह छोटी उम्र से ही समाजवाद से प्रेरित थे। इस विषय पर अपना ज्ञान बढ़ाने के लिए वह लेनिन और उनकी अगुवाई वाले क्रांतियों के बारे में पढ़ते थे। जिसकी वजह से ही वो नास्तिक बन गए थे। यहां तक कि उन्‍होंनें सिख धर्म से जुड़ी मान्‍यताओं को भी मानना छोड़ दिया था।

1929 में भगत सिंह ने बटुकेश्वर दत्त और राजगुरु के साथ असेंबली में बम धमाके की योजना बनाई। बताया जाता है कि यह बम सिर्फ आजादी की लड़ाई के आगाज की सूचना अंग्रेजों के लिए पहुंचाना था। भगत सिंह और बटुकेश्वर ने एक-एक बम फेंका। धमाके में किसी की मौत नहीं हुई थी। भगत सिंह को गिरफ्तार कर लिया गया। जेल में कैद रहने के दौरान भगत सिंह ने डायरी और किताबें भी लिखीं। अंग्रेजों ने 23 मार्च 1931 को लाहौर जेल में भगत सिंह को फांसी दे दी थी।

शहीद भगत सिंह पर बॉलीवुड में कई फ़िल्में भी बनी हैं जिनमें उनके क्रांतिकारी जीवन को दिखाया गया है,

शहीद-ए-आजम

साल 2002 में भगत सिंह पर आधारित शहीद-ए-आजम आई थी। इस फिल्म में सोनू सूद ने भगत सिंह का किरदार निभाया था।

द लेजेंड ऑफ़ भगत सिंह

इस फिल्म में अजय देवगन ने क्रांतिकारी भगत सिंह का रोल प्ले किया था।

रंग दे बसंती

2006 में फिल्म रंग दे बसंती आई। इसमें आमिर खान ने चंद्रशेखर आजाद का किरदार तो एक्टर सिद्धार्थ नारायण सिंह ने भगत सिंह का रोल प्ले किया था।

शहीद

साल 1965 में दिग्गज अभिनेता मनोज कुमार ने फिल्म शहीद में भगत सिंह का किरदार निभाया था।

शहीद-ए-आजाद भगत सिंह

भगत सिंह पर बनी पहली फिल्म का नाम शहीद-ए-आजाद भगत सिंह था। यह फिल्म साल 1965 में आई थी। इस फिल्म में भगत सिंह का किरदार एक्टर जयराज ने निभाया था।