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तुर्की – चीन का पैतरा फेल , ग्रे लिस्ट में शामिल पाकिस्तान

पाकिस्तान का अफसाना अब पूरी दुनियी बयां कर रही है। पाकिस्तान को अंतरराष्ट्रीय संस्था ने लाखो बार चेताया था कि अपनी करतूत पर अमल करे। मौत के सौदागर से सौदा ना करें बल्कि अंतरराष्ट्रीय संगठन के साथ मिलकर खत्म करने में अपनी भागिदारी निभाए।लेकिन मोटी चमड़ी के पाकिस्तान को कुछ समझ आने वाला कहां था। पहले से ही दिवालिया होने के कगार पर पहुंच चुके पाकिस्तान पर फाइनेंशियल एक्‍शन टास्‍क फोर्स की सख्त कार्रवाई कि तलवार लटकने वाली है। एफएटीएफ ने पाक को डार्क ग्रे लिस्ट में डालने जा रही।

लाखो केशिशो और सदाबहार मित्रो यानी (तुर्की ,चीन और मलेशिया) की मदद के बावजूद पाकिस्तान खुद को एफएटीएफ की ग्रे लिस्ट से बाहर निकालने में नाकाम रहा। फ्रांस कि राजधानी में शुरू हुई एफएटीएफ कि बैठक में पाकिस्तान अकेला पड़ गया है और उसे सुधार कि आखिरी तारिक कि चैतावनी के साथ डार्क ग्रे लिस्ट में डाला जा सकता है। पिछले साल पाकिस्तान को अमेरिका ने ब्लेक लिस्ट कर दिया था क्योंकि पाकिस्तान दुनिया का सबसे ख़तरनाक देश बन चुका है। क्योंकि पाक ऐसा देश है जहां आतंकि आंका को बसा कर रखा जाता है। आतंक की पाठशाला खोल कर सबको आतंक फैलाने कि ट्रेनिंग देने वाला देश रहा है।

आपको बता दें कि पहले अमेरिका से ब्लेक लिस्टेट हो चूके पाक को तुर्की और चीन चालाकी से ब्लेक लिस्टेट होने से तो बचा लिया है लेकिन फिर भी एफएटीएफ की ग्रे लिस्ट से बाहर निकले में नकाम रही। एफएटीएफ ने पाकिस्तान को दो टूक में कह दिया कि यदि वह लश्कर-ए-ताईबा और जैस-ए-म्हम्मद जैसे आतंकी गुटों कि फंडिंग रोकने में विफल रहा तो उसे ब्लैक लिस्टैट कर दिया जाएगा। एफएटीएफ टेरर फंडिंग पर नजर रखने वाली संस्‍था है जो आतंकियों को पालने-पोसने के लिए पैसा मुहैया कराने वालों पर नजर रखने वाली एजेंसी है।

फिलहाल पाकिस्तान, एफएटीएफ की निगरानी सूची में शामिल है और पाकिस्तान को ग्रे लिस्ट से बाहर निकलने के लिए 39 सदस्यीय में 12 सदस्य का समर्थन चाहिए लेकिन कोई भी देश उसका साथ नहीं दे रहा है। तुर्की और मलेशिया के अलावा मोटे तौर पर उसके सदाबहार दोस्त चीन ने खुद परखतरा ना मंडराए इसलिए इस बार खुलकर बाहर ना आकर पर्द के पीछे से अपनी भूमिका निभाई।

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