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ख़ुफ़िया एजेंसियों ने पहले ही कर दिया था अलर्ट


नईदिल्ली: जम्मू कश्मीर के पुलवामा में जैश-ए-मोहम्मद ने सीआरपीएफ जवानों के काफिले पर इतना बड़ा और घातक हमला कर सुरक्षा बलों के मनोबल पर सीधा हमला किया है. बीती पांच फरवरी को जैश-ए-मोहम्मद ने पाकिस्तान में रैली कर भारत पर हमले की बात कही थी. जैश-ए-मोहम्मद की कराची रैली में संसद हमले के मास्टरमाइंड अफजल गुरु के नाम पर आत्मघाती दस्ते बनाए जाने का ऐलान किया गया था. रैली के दौरान आतंकी हाफिज सईद ने पीएम मोदी को धमकी देते हुए कहा था कि मोदी अपनी फौज लेकर कश्मीर से निकल जा और नहीं निकलेगा तो बहुत कुछ छोड़ना पड़ेगा। इस धमकी के बाद कश्मीर में हमला हुआ और 44 जवान शहीद हो गए.

पाक अधिकृत कश्मीर के आंतकी कैंप में अब्दुल रशीद गाजी ने इस हमले को अंजाम देने वाले आदिल अहमद डार को आईईडी धमाके की ट्रेनिंग दी थी. खुफिया एजेंसियों ने दिसंबर में ही अलर्ट जारी किया था कि गाजी कश्मीर में घुस चुका है। गाजी अफगानिस्तान में तालिबानी आतंकियों के साथ भी काम कर चुका है.

इस धमकी को देखते हुए अभी हाल ही में खुफिया एजेंसी ने 8 फरवरी को बाकायदा IED हमले का अलर्ट जारी किया था। साफ तौर पर हिदायत थी कि बगैर इलाकों को sanitize किये सुरक्षा काफिले आगे न बढ़ें। सोचने वाली बात यह है कि इस बेहद अहम अलर्ट के बावजूद इतने बड़े आतंकी हमले को कैसे अंजाम दे दिया गया. कहीं न कहीं अलर्ट की अनदेखी की गई थी.

जैश प्रवक्ता ने हमले की जिम्मेदारी लेते हुए वीडियो जारी कर दावा किया है कि इसे आदिल अहमद डार उर्फ वकास कमांडो ने अंजाम दिया। वह पुलवामा के गुंडी बाग से आतंकी नेटवर्क चलाता था। पुलवामा के काकापोर का रहने वाला डार 2018 में जैश में शामिल हुआ था। डार जैश के अफजल गुरु स्क्वाड से जुड़ा था। इस गुट ने लालचौक पर हुए हमले की जिम्मेदारी ली थी और उड़ी हमले में शामिल था.

नवंबर, 2007 में उत्तर प्रदेश पुलिस के एसटीएफ द्वारा लखनऊ में गिरफ्तार किए गए जैश-ए-मोहम्मद के आतंकवादियों ने पूछताछ में खुलासा किया था कि वह राहुल गांधी के अपहरण के लिए देश में आए थे.