क्राइम

जब राज्यसभा में उठा पत्रकार की हत्या का मामला!

पत्रकारों की हत्‍या का मामला अब राज्‍यसभा में जोर-शोर से उठा है। भारतीय कम्‍युनिकस्‍ट पार्टी (मार्क्‍सवादी) के माकपा सदस्‍य झरना दास वैद्य ने गुरुवार को यह मामला उठाते हुए इस तरह के हमलों को रोकने और प्रेस की स्वतंत्रता की रक्षा के लिए किए गए उपायों पर सरकार से स्पष्टीकरण मांगा।

उन्‍होंने कहा कि भ्रष्‍टाचार, कानून का उल्‍लंघन और गलत नीतियों के बारे में खबर छापने के कारण पत्रकारों पर हमले किए जा रहे हैं। पत्रकारों के पास सच बोलने की आजादी है लेकिन इसके लिए उन पर हमले हो रहे हैं। ऐसी स्थिति में वे कैसे अपने कार्यों को सही ढंग से अंजाम देंगे। पत्रकार गौरी लंकेश ने एक पूर्व मुख्‍यमंत्री के बारे में काफी रिपोर्ट छापी थीं। ऐसे में उनकी हत्‍या कर दी गई।

वैद्य ने कहा कि त्रिपुरा में दैनिक अखबार देशेर कथा का सर्कुलेशन 52000 था लेकिन 2018 के चुनाव के बाद यह घटकर सिर्फ 6000 रह गया क्‍योंकि इसके रिपोर्टरों को धमकी दी जा रही थी कि अखबार का प्रकाशन बंद करा दिया जाएगा। विपक्षी पार्टियों के कई सदस्‍यों ने इस पर चिंता जताई।

शून्‍यकाल के दौरान यह मामला उठाते हुए वैद्य ने कहा कि इस साल देश में पांच पत्रकारों की हत्‍या हुई है। कश्‍मीर में शुजात बुखारी की उनके ऑफिस के बाहर ही गोली मारकर हत्‍या कर दी गई। वरिष्‍ठ पत्रकार गौरी लंकेश की हत्‍या उनके घर के बाहर हुई। इसी तरह पंजाब में भी एक वरिष्‍ठ पत्रकार की हत्‍या कर दी गई। इसके अलावा त्रिपुरा में दो पत्रकार मारे गए।

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