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भौतिकी के क्षेत्र में भारत को ख्याति दिलाने वाले सी वी रमन को नमन

आज महान वैज्ञानिक सी.वी रमन जी का 168वां जन्मदिन है। उनका जन्म 7 नवंबर,1888 तिरुचिरापल्ली, तमिलनाडु में हुआ था।उनके पिता का नाम चंद्रशेखर अय्यर तथा माता का नाम पार्वती अम्मल था।

आज महान वैज्ञानिक सी.वी रमन जी का 168वां जन्मदिन है। उनका जन्म 7 नवंबर,1888 तिरुचिरापल्ली, तमिलनाडु में हुआ था।उनके पिता का नाम चंद्रशेखर अय्यर तथा माता का नाम पार्वती अम्मल था।साथ ही उनको नोबेल पुरस्कार, भारत रत्न और लेनिन पुरस्कार से भी सम्मानित किया गया था।उनकी मृत्यु हार्ट अटैक की वजह से 21 नवम्बर,1970 में बैंगलोर के रमन रिसर्च इंस्टिट्यूट में हुई थी।

सी.वी रमन जी का जन्मदिन के अवसर पर आईये हम आपको बताते है उनके जीवन की उपलब्धियाँ –

  • ग्रेजुएशन में फिजिक्स में मिला जीवन का पहला गोल्ड मैडल सी.वी रमन हमेशा से ही पढ़ने में बहुत अच्छे थे और उन्होंने अपनी 12वीं की पढ़ाई स्कॉलरशिप से पूरी की। इसके बाद उन्होंने अपना ग्रेजुएशन ‘प्रेसीडेंसी कॉलेज मद्रास (चेन्नई)’ से साल1904 में प्रथम श्रेणी के साथ पूरा किया, इसके साथ ही सीवी रमन ने इस दौरान पहली बार फिजिक्स में ‘गोल्ड मेडल’ भी प्राप्त किया था।

 

  • मात्र 18 साल की उम्र में ही हासिल की ऐसी सफलता

मास्टर करने के साथ ही उन्होंने ध्वनि और प्रकाश (Acoustics and Optics) के क्षेत्र में रिसर्च करनी शुरु कर दी थी।उनके प्रोफेसर     आर एस जोन्स भी उनकी रिसर्च
देखकर काफी प्रभावित हुए और उन्होंने उनके रिसर्च वर्क को ‘शोध पेपर’ के रुप में पब्लिश करवाने की सलाह दी, जिसके बाद            नवंबर, साल 1906 में लंदन की पत्रिका ‘फ़िलॉसफ़िकल पत्रिका’ में उनका शोध ‘प्रकाश का आणविक विकिरण’ को प्रकाशित किया        गया।

  • सी.वी रमन की पहली सरकारी नौकरी

मास्टर डिग्री हासिल करने के बाद उन्होंने ब्रिटिश सरकार द्वारा आयोजित परीक्षा दी, जिसमे वो सफल भी रहे। इसके बाद उन्हें     सरकार के वित्तीय विभाग में नौकरी करने का मौका मिला, फिर कोलकाता में उन्होंने सहायक लेखापाल के तौर पर अपनी पहली     सरकारी नौकरी ज्वाइन की।नौकरी के दौरान भी उन्होंने एक्सपेरिंमेंट और रिसर्च करना नहीं छोड़ा, वे कोलकाता में ‘इण्डियन   एसोसिएशन फॉर कल्टिवेशन ऑफ साइंस’ लैब में अपनी खोज करते रहते थे।

  • सरकारी नौकरी से इस्तीफा देकर कलकत्ता यूनिवर्सिटी में बने प्रोफेसर

विज्ञान के क्षेत्र में आगे बढ़ने के उद्देश्य से साल 1917 में ही उन्होंने अपनी सरकारी नौकरी छोड़कर, ‘इण्डियन एसोसिएशन फॉर       कल्टिवेशन ऑफ साइंस’ लैब में मानद सचिव के पद पर काम किया।वहीँ साल1917 में ही उन्हें कलकत्ता यूनिवर्सिटी से भौतिक         विज्ञान के प्रोफेसर का भी जॉब ऑफर मिला था,जिसके बाद वो कलकत्ता यूनिवर्सिटी में भौतिक विज्ञान के प्रोफेसर के रूप में काम   करने लगें।
इसके बाद उन्हें ‘ऑपटिक्स’ के क्षेत्र में सराहनीय योगदान देनें के लिए साल 1924 में लंदन की ‘रॉयल सोसायटी’ की सदस्य बनाया   गया।

  • किस वजह से मिला नोबल पुरूस्कार

8 फरवरी, साल 1928 को कड़ी मेहनत और लगन के बाद उन्होंने ‘रमन प्रभाव’ की एक बड़ी खोज की।इस रिसर्च में उन्होंने ये बताया   की आखिर समुद्र का जल नीले रंग का क्यों होता है और कोई लाइट किसी पारदर्शी माध्यम से होकर गुजरती है तो उसके नेचर और   बिहेवियेर में चेंज आ जाता है। उनकी इस बड़ी खोज को प्रतिष्ठित वैज्ञानिक पत्रिका ‘नेचर’ ने इसे प्रकाशित किया। इसी खोज की   वहज से उन्हें 28 फरवरी,1930 को भारत के प्रतिष्ठित पुरस्कार ‘नोबेल पुरस्कार’ से भी नवाजा गया। वहीं इसी दिन को ‘राष्ट्रीय   विज्ञान दिवस’ के रुप में मनाये जाने की भी घोषणा की।

  • ‘रमन रिसर्च इंस्टिट्यूट’ की स्थापना की

साल 1948 में सीवी रमन ने वैज्ञानिक रिसर्च को बढ़ावा देने के लिए ‘रमन रिसर्च इंस्टिट्यूट’, बैंग्लोर की स्थापना की थी।

  • सी वी रमन को ‘भारत रत्न’ अवार्ड से भी नवाजा गया

विज्ञान के क्षेत्र में महत्वपूर्ण योगदान के लिए साल 1954 में उन्हें भारत के सर्वोच्च सम्मान ‘भारत रत्न’ से भी सम्मानित किया गया।

BY: MAHIMA GUPTA

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