देशबड़ी खबरब्रेकिंगब्लॉगविदेश

जानें आखिर क्यों 25 दिसंबर को मनाया जाता है ‘Christmas’

25 दिसंबर को पूरी दुनिया क्रिसमस डे के तौर पर मनाती है. 24 दिसंबर की शाम से ही इस त्योहार का जश्न शुरू हो जाता है। यूरोपीय और पश्चिमी देशों में इस दौरान खूब रंगारंग कार्यक्रम आयोजित किए जाते हैं। भारत में गोवा राज्य में क्रिसमस की काफी धूम रहती है इसके अलावा विभिन्न शहरों की बड़ी चर्चों में भी इस दिन सभी धर्मों के लोग एकत्रित होकर प्रभु यीशु का ध्यान करते हैं।
ईसाई समुदाय के लोग इसे यीशू मसीह के जन्मदिवस के रूप में मनाते हैं. शुरुआत में ईसाई समुदाय के लोग ईसा मसीह के जन्मदिन को एक त्योहार के रूप में नहीं मनाते थे, लेकिन चौथी शताब्दी के आते-आते उनके जन्मदिन को एक त्योहार के तौर पर ही मनाया जाने लगा.

क्रिसमस  त्योहार के पीछे की  कहानी

हर त्यौहार के पीछे एक कहानी होती है। इसी तरह से क्रिसमस के त्योहार के पीछे भी एक कहानी है.
आज से करीब 2000 साल पहले की है. बाइबल के अनुसार उस समय रोम का शासन होता था और लोगों पर काफी अत्याचार किए जाते थे. लोगों की पीड़ा को कम करने के लिए तथा लोगों को रोम के शासन से बचाने के लिए प्रभु ने जीसस को धरती पर भेजा था.

प्रभु ने जीसस के जन्म के लिए वहां की एक कन्या Merry को चुना और प्रभु ने Merry के पास एक देवदूत को भेजा.
देवदूत ने Merry के पास जाकर कहा कि तुम्हें प्रभु के पुत्र जीसस को जन्म देना है. देव दूत ने आगे बताया कि आपका यह बेटा बड़ा होकर राजा बनेगा तथा लोगों पर हो रहे अत्याचारों को कम करेगा. प्रभु के द्वारा भेजी गई दूत Gabriel थी। .

जिस दिन जीसस का जन्म होने वाला था उस समय Merry और जोसेफ बेथलेहम की ओर जा रहे थे. बेथलेहम में उस समय काफी भीड़ थी और रहने के लिए कहीं भी जगह नहीं थी. तब Merry और जोसफ उस रात एक अस्तबल (तबेले) में रात गुजारी. इसी रात जीसस का जन्म हुआ और इस दौरान आकाश में एक चमकता हुआ तारा दिखाई दिया जिससे लोगों को आभास हो गया कि उनके प्रभु ने धरती पर अवतार ले लिया है.

इस बात की भविष्यवाणी पहले ही हो चुकी थी कि जिस दिन आकाश में सबसे ज्यादा चमकता हुआ तारा दिखाई दे उसी दिन समझ लेना कि धरती पर तुम्हारे प्रभु ने जन्म ले लिया है. प्रभु के जन्म लेने से सभी लोग बहुत खुश हो गए। ईसा मसीह ने अब लोगों के बीच में रहकर उनकी सेवा करनी शुरू कर दी और उनके दुख दर्द को दूर करने का प्रयास करने लग गए.
ईसा मसीह ने हमेशा लोगोंको भाईचारे, मानवता और प्रेम से रहने का संदेश दिया. वह हमेशा कहते थे कि..

जो तुम्हारा बुरा करता है उसकी भी तुम भलाई करो और अपने शत्रुओं से भी प्रेम करो.

क्रिसमस को खास उसकी परम्पराएं बनाती हैं.

 1 .संता निकोलस

इनमें से एक संता निकोलस हैं जिनका जन्म ईसा मसीह की मृत्यु के लगभग 280 साल बाद मायरा में हुआ था. उन्होंने अपना पूरा जीवन यीशू को समर्पित कर दिया. उन्हें लोगों की मदद करना बेहद पसंद था. यही वजह है कि वो यीशू के जन्मदिन के मौके पर रात के अंधेरे में बच्चों को गिफ्ट दिया करते थे. इस वजह से बच्चे आज भी अपने संता का इंतजार करते हैं.

2 .क्रिसमस ट्री

क्रिसमस की परम्पराओ में क्रिसमस ट्री की भी मान्यता है। क्रिसमस ट्री की कहानी प्रभु यीशु मसीह के जन्म से है | जब उनका जन्म हुआ तब उनके माता पिता मरियम एवं जोसेफ को बधाई देने वालो ने एक सदाबहार फर को सितारों से रोशन किया था | तब से ही सदाबहार क्रिसमस फर के पेड़ को क्रिसमस ट्री के रूप में मान्यता मिली | मार्टिन लूथर ने इन्हें पहली बार मोमबत्तियो से जलाकर सजाया था |

3 .क्रिसमस केक

ईसा मसीह के जन्मदिन की खुशी में लोग केक काटते हैं, केक काटने के पीछे प्राचीन परम्परा मानी जाती हैं।क्रिसमस केक का इतिहास 16 वीं सदी के पास का हैं इससे पहले लोग केक का इस्तेमाल नहीं करते थे यह लोग इस दिन ब्रेड और सब्जियों से एक स्पेशल डिश तैयार करते थे, इंग्लैंड में प्लम पुडीज की रिवाज मानी जाती हैं। तब से लेकर आज तक लोग क्रिसमस के दिन खुशिया बनाने के लिए प्लम केक का इस्तेमाल करते हैं।

Tags
Show More

Related Articles

Close
Close