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भूलकर भी ना चढ़ाएं महादेव पर ये चीजें


महिमा गुप्ता

देवों के देव महादेव का वार, सोमवार माना जाता है। ऐसे में कहा जाता है कि यदि सोमवार को भगवान शिव की सच्चे मन से पूजा की जाए तो भक्तों की मनोकामनाएं पूर्ण हो जाती हैं और इनकी पूजा से भक्तों के कष्ट भी मिट जाते हैं l

पुराणों और शास्त्रों में शिव को भोलेनाथ कहा गया है। इसका मतलब यह हुआ कि शिव बहुत जल्द प्रसन्न होते हैं। भगवान शिव को प्रसन्न करने के लिए उनकी मनपसंद चीज जैसे बेलपत्र, शमीपत्र, धतूरा, भांग और मदार के फूल चढ़ाए जाते हैं | ऐसे में आप सब बखूबी वाकिफ होंगे कि शिवजी पर क्या नहीं चढ़ाया जाता है | तो क्या आपने इसकी वजह जानने की कोशिश की है, कि क्यों नहीं चढ़ाई जाती है शिवजी पर यह चीजें

नहीं चढ़ता है शिवजी पर शंख से जल, जानिए क्या है वजह

भगवान शिव ने शंखचूड़ नामक असुर का अपने त्रिशूल से वध किया था | जिसके बाद उसका शरीर भस्म हो गया और फिर उसी भस्म से शंख की उत्पत्ति हुई थी। शिवजी ने शंखचूड़ का वध किया इसलिए कभी भी शंख से शिवजी का अभिषेक या जल नहीं चढ़ाया जाता है l

नहीं चढ़ाए जाते शिवजी पर तुलसी के पत्ते, जानिए क्या है वजह

पुराणों में लिखा है कि भगवान शिव ने तुलसी के पति असुर जलंधर का वध किया था। इससे पवित्र तुलसी ने स्वयं भगवान शिव को अपने स्वरूप से वंचित कर यह श्राप दिया कि आपकी पूजन सामग्री में मैं नहीं रहूंगी।

नहीं चढ़ाई जाती शिवजी पर तिल जानिए क्या है वजह

माना जाता है की तिल भगवान विष्णु के मैल से उत्पन्न हुआ है इसलिए इसे भगवान शिव को नहीं चढ़ाया जाता l

नहीं चढ़ाया जाता शिवजी पर कौन-कौन कुमकुम जानिए क्या है वजह

भक्त भगवान शिव को अनजाने में कुमकुम का टीका लगा देते हैं तो क्या आप लोगों ने कभी जानने की कोशिश की है कि कुमकुम भगवान शिव पर चढ़ता है या नहीं ?
सिंदूर, शादीशुदा स्त्रियों का गहना माना गया है। स्त्रियां अपने पति की लंबी उम्र के लिए, अपनी मांग में सिंदूर लगाती हैं और देवियों को भी अर्पित करती हैं। लेकिन शिव तो विनाशक हैं, तो उन पर सिंदूर नहीं चढ़ाया जाता है पर उनकी पूजा में आप चंदन और भस्म जरूर चढ़ा सकते हैं | क्योंकि उनको भस्म अति प्रिय है l

नहीं चढ़ाई जाती है शिवजी पर हल्दी जानिए क्या है वजह

शास्त्रों की माने तो शिवलिंग पुरुष तत्व का प्रतीक है और हल्दी नारी सुलभ वस्तु है। नारी सुलभ यानी नारी से संबंधित। इसी वजह से शिवलिंग पर हल्दी नहीं चढ़ाई जाती है।

नहीं चढ़ाई जाती शिवजी पर केतकी के फूल जानिए क्या है वजह

शिव पुराण के अनुसार एक बार ब्रह्मा और विष्णु में बहस छिड़ गई कि हम दोनों में सर्वश्रेष्ठ कौन हैं | बहस को सुलझाने के लिए भगवान शिव को न्यायधीश बनाया गया l तब भगवान शिव ने अपनी माया से एक ज्योतिर्लिंग प्रकट की और कहां जो इस ज्योतिर्लिंग का आदि और अंत बता देगा वह सर्वश्रेष्ठ कहलाएगा l ब्रह्मा ज्योतिर्लिंग का आदि पता करने ऊपर की ओर चले गए और विष्णु अंत पता करने का नीचे की ओर | ब्रह्मा के बहुत ऊपर जाने पर फिर भी ज्योतिर्लिंग का आदि ना पता चल सका पर उन्होंने देखा कि केतकी फूल मेरे साथ ही नीचे आ रहा है | उन्होंने केतकी फूल से झूठ बोलने को कहा कि आप नीचे जाकर यह प्रमाण दे देना कि मैंने ज्योतिर्लिंग का आदि ढूंढ लिया है | लेकिन भगवान शिव ब्रह्माजी के झूठ को जान गए और ब्रह्माजी का एक सिर काट दिया। इसलिए ब्रह्माजी पंचमुख से चार मुख वाले हो गए। केतकी के फूल ने झूठ बोला था इसलिए भगवान शिव ने इसे अपनी पूजा से वर्जित कर दिया है।