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राहुल गांधी ने मोदी सरकार की नीतियों पर खड़े किए सवाल, लॉकडाउन के बाद कुछ ऐसे होंगे भारत के हालत


नई दिल्ली। कोरोना वायरस से छुटकारा पाने के लिए देश पिछले एक महीने से ज्यादा समय से लॉकडाउन की मार झेल रहा है। इसने अर्थव्यवस्था को लेकर गंभीर चुनौतियां खड़ी कर दी हैं। जिससे लोग घबराए हुए हैं। वहीं इसको लेकर कांग्रेस के पूर्व अध्यक्ष राहुल गांधी ने रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया के पूर्व गवर्नर रघुराम राजन से बातचीत की। जिसमें उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की नीतियों पर सवाल खड़े किए हैं।

राहुल गांधी ने रघुराम राजन से पूछा कि सत्ता का केंद्रीकरण हो गया है, जिससे बातचीत लगभग बंद हो गई है। बातचीत और संवाद से कई समस्याओं का समाधान निकलता है।

इस पर जवाब देते हुए रघुराम राजन ने कहा कि विकेंद्रीकरण न सिर्फ स्थानीय सूचनाओं को सामने लाने के लिए जरूरी है बल्कि लोगों को सशक्त बनाने के लिए भी अहम है।

रघुराम राजन ने कहा, पूरी दुनिया में इस समय यह स्थिति है कि फैसले कहीं और किए जा रहे हैं। मेरे पास एक वोट तो है दूरदराज के किसी व्यक्ति को चुनने का।

मेरी पंचायत हो सकती है, राज्य सरकार हो सकती है, लेकिन लोगों में यह भावना है कि किसी भी मामले में उनकी आवाज नहीं सुनी जाती। ऐसे में वे विभिन्न शक्तियों का शिकार बन जाते हैं।

रघुराम राजन ने कहा कि हमारे पास लोगों के जीवन को बेहतर करने का तरीका है, फूड, हेल्थ एजुकेशन पर कई राज्यों ने अच्छा काम किया है, लेकिन सबसे बड़ी चुनौती लोअर मिडिल क्लास और मिडिल क्लास के लिए है जिनके पास अच्छे जॉब नहीं होंगे। आज वक्त की जरूरत है कि लोगों को सिर्फ सरकारी नौकरी पर निर्भर ना रखा जाए, उनके लिए नए अवसर पैदा किए जाएं।

राहुल गांधी ने सवाल किया कि कोरोना संक्रमण से नौकरियों पर क्या असर पड़ेगा। इस पर जवाब देते हुए रघुराम राजन ने कहा कि आंकड़े बहुत ही चिंतित करने वाले हैं। सीएमआईई के आंकड़े देखो तो पता चलता है कि कोरोना संकट के कारण करीब 10 करोड़ और लोग बेरोजगार हो जाएंगे। इसमें 5 करोड़ लोगों की नौकरी तो जाएगी ही, करीब 6 करोड़ लोग श्रम बाजार से बाहर हो जाएंगे। रघुराम राजन ने कहा, यह आंकड़े बहुत व्यापक हैं। इससे हमें सोचना चाहिए कि नापतौल कर हमें अर्थव्यवस्था खोलनी चाहिए, लेकिन जितना तेजी से हो सके, उतना तेजी से यह करना होगा जिससे लोगों को नौकरियां मिलना शुरू हों।